Pawan Singh: भोजपुरी के पावरस्टार कहे जाने वाले पवन सिंह ने बीजेपी के खिलाफ जाकर 2024 में काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था लेकिन वे हार गए थे. 2024 में बीजेपी से भले पवन सिंह का मोहभंग हुआ हो लेकिन वे लगातार इशारा दे रहे हैं कि वे अभी भी पार्टी (बीजेपी) के नेताओं के करीब हैं. पवन सिंह इन दिनों बीजेपी के नेताओं को उनके जन्मदिन पर लगातार बधाई दे रहे हैं. इससे सवाल भी उठ रहा है कि क्या बीजेपी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव तो नहीं लड़ना चाहते हैं?
दरअसल बीते रविवार (02 फरवरी) को बीजेपी नेता और आजमगढ़ के पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ का जन्मदिन था. उनके जन्मदिन पर पवन सिंह ने उन्हें बधाई दी. एक्स पर दिनेश लाल यादव निरहुआ को टैग करके लिखा, "सरल स्वभाव मृदभाषी सौम्य आज़मगढ़ के लोकप्रिय पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाएं. ईश्वर से कामना है कि आप स्वस्थ एवं दीर्घायु रहें." इस पर दिनेश लाल यादव ने भी जवाब दिया. लिखा, "भाई आपकी स्नेह भरी शुभकामनाओं के लिए हृदयतल से आभार."
सांसद मनोज तिवारी को भी दी बधाई
वहीं दिनेश लाल यादव से पहले एक फरवरी को पवन सिंह ने सांसद मनोज तिवारी को उनके जन्मदिन की बधाई दी. लिखा, "उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद व भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बड़े भैया मनोज तिवारी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाएं. ईश्वर से कामना है कि आप स्वस्थ व दीर्घायु रहें." इसके पहले आठ जनवरी को पवन सिंह ने बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह को भी पवन सिंह ने जन्मदिन की बधाई दी थी.
पवन सिंह की ओर से बीजेपी नेताओं को दिया जा रहा बधाई संदेश अपने आप में यह बताता है कि उनका संपर्क पार्टी के नेताओं से है. ऐसे में अगर पवन सिंह को लगता है कि उन्हें एक बार फिर से चुनावी मैदान में उतरना चाहिए तो वे बीजेपी से टिकट के लिए लग सकते हैं. वजह यह है कि उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़कर देख लिया और उसका नतीजा क्या हुआ वह सबके सामने है. हालांकि देखना होगा कि पवन सिंह आने वाले समय में क्या फैसला करते हैं.
पवन सिंह की पत्नी लड़ना चाहती हैं चुनाव
दूसरी ओर हाल ही में पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव में उतरने की बात कही थी. रोहतास में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की थी. कहा था कि जनता जहां से आशीर्वाद देगी वो वहां से चुनाव लड़ेंगी. अगर किसी पार्टी से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए भी वे तैयार हैं.
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