SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी विवाद के बीच अब NDA में सवाल उठने लगे हैं. चिराग पासवान के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने 'कंफ्यूजन' दूर करने की मांग की है. शुक्रवार (25 सितंबर) को अपने एक्स पोस्ट में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि एसआईआर से संबंधित विवाद पर जनता में काफी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है. विषय को एड्रेस करने की जरूरत है. कंफ्यूजन दूर करने के लिए चुनाव आयोग के द्वारा अविलंब सही स्थिति पर स्पष्टीकरण आना चाहिए.

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BJP के सहयोगी हैं चिराग-कुशवाहा

चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा दोनों ही बिहार में बीजेपी ने नेतृत्व वाली सरकार के सहयोगी हैं. इससे पहले चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग को जनता के मन में उत्पन्न हुईं शंकाओं को दूर करना चाहिए. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष ने कहा कि वह सरकार का हिस्सा होने के नाते किसी संवैधानिक संस्था का बचाव नहीं करना चाहते और विपक्षी नेताओं, विशेषकर राहुल गांधी के आरोपों को वह अधिक महत्व नहीं देते.

कल कुशावाह ने टिप्पणी करने से किया था इनकार

यहां ये बता दें कि कल ही जब पटना में उपेंद्र कुशवाहा से मीडिया ने इस पूरे विवाद को लेकर सवाल किया था उन्होंने जबाव में कहा था कि ये चुनाव आयोग का विषय है और वो इस पर टिप्पणी नहीं करते. कुशवाहा ने चुनाव आयोग का जिक्र करते हुए कहा था कि कहीं भी मतभेद होना अस्वाभाविक नहीं है. मतभेद दो व्यक्तियों में हो सकता है.  

पटना में आज मीडिया से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है. अपना संरक्षण उन्हें खुद ही करना होगा. चुनाव आयोग या उनकी पारदर्शिता को लेकर अगर जनता के बीच में इस तरह का कोई भ्रम जाता है तो ये जिम्मेदारी चुनाव आयोग और खासतौर पर सीईसी की बनती है कि वो अपनी तरफ से पक्षों को मजबूती से रखें.

गौरतलब है कि बिहार से ही एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई थी. विपक्ष सरकार और चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाता रहा है. अब बिहार की सरकार में शामिल दलों ने ही हालिया विवाद के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठा दिए हैं. 

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