यूजीसी के नए नियमों को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले सांसद पप्पू यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान असली मुद्दों से हटाकर लोगों को उलझाने पर है.
पप्पू यादव ने कहा, “एक बात समझिए. यह सरकार इस देश में विकास, आम आदमी के रोजगार, किसानों की जिंदगी, अर्थव्यवस्था और भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों से कोई मतलब नहीं रखती. यह समाज और धर्म के नाम पर लोगों को उलझाकर रखती है और हर मुद्दे को खुद ही पैदा करती है.”
उन्होंने आगे कहा, “एससी-एसटी एक्ट को याद कीजिए, इसे इन्होंने ही पैदा किया था और देश में झगड़े करवाए थे. आप कई ऐसे मुद्दे उठाकर देखिए, तो पाएंगे कि इन्होंने समाज को तोड़ने और नफरत फैलाने की कोशिश की है.”
धार्मिक आजादी और बनारस का जिक्र
पप्पू यादव ने धार्मिक स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “जबकि आज सभी धर्मों और मजहब के लोगों को पूजा करने की आजादी है, छठ मनाने की आजादी है, हम सब स्वतंत्र हैं. भगवान आस्था का विषय है. लेकिन अब बनारस के घाट पर इफ्तार करने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया. ये लोग लगातार ध्यान भटकाने का काम करते रहते हैं.”
यूजीसी मुद्दे के राजनीतिकरण का आरोप
यूजीसी नियमों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “यूजीसी के मुद्दे पर भी गलत तरीके से तोड़-मरोड़ कर समाज के बच्चों के बीच इसे राजनीतिक बनाया जा रहा है, जो बिल्कुल गलत है. सर्वोच्च न्यायालय को चाहिए कि वह सुनिश्चित करे कि फैसले बच्चों के हित में हों.”
उन्होंने यह भी कहा, “अब इस मामले में हम क्या कहें? हर मुद्दे पर सरकार असली समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए यूजीसी जैसे मुद्दों का राजनीतिकरण करती है.”
शिक्षा और रोजगार पर जोर
पप्पू यादव ने शिक्षा और रोजगार के मुद्दे को सबसे अहम बताया. उन्होंने कहा, “इसलिए हमारे बच्चों के बीच कोई बंटवारा नहीं होना चाहिए. शिक्षा, यानी समान शिक्षा की जो बात है, और जिस तरह शिक्षा को खत्म करने की एक गहरी साजिश चल रही है, उन मुद्दों पर विचार करने की जरूरत है.”
साथ ही उन्होंने रेलवे में महिलाओं के लिए रोजगार की बात दोहराई और कहा कि 33 प्रतिशत बच्चियों को नौकरी में अवसर मिलना चाहिए, जिसमें किसी तरह का भेदभाव न हो.
