प्लास्टर की जगह कार्टन बांधा, भड़के तेजस्वी यादव, सीधे PM मोदी को घेरा
पूरा मामला बिहार के जहानाबाद जिले का है. पैर में कार्टन बांधे जाने की खबर सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने नोटिस जारी किया है. वहीं तेजस्वी यादव ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.

जहानाबाद के सदर अस्पताल से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. पूरा मामला बीते गुरुवार (10 सितंबर, 2026) का है. इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे दो किशोर जो सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए थे उनके पैर में प्लास्टर की जगह कार्टन बांध दिया गया और पटना (पीएमसीएच) रेफर कर दिया गया.
जानकारी के अनुसार, हुलासगंज थाना क्षेत्र के धरमपुर मोड़ के समीप बीते गुरुवार को दो बाइक के बीच टक्कर हो गई थी. इस हादसे में चार किशोर जख्मी हो गए. इनमें रामगंज निवासी प्रह्लाद कुमार को और धरमपुर निवासी राजा कुमार को दोपहर में सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, लेकिन, इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने किशोरों की गंभीर हालत देखने के बावजूद सिर्फ पर्ची पर रेफर लिखकर पल्ला झाड़ लिया.
इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने आनन-फानन में प्लास्टर की जगह दवा के खाली कार्टन को फाड़ा और उसे ही पैर पर लपेटकर मरीजों को विदा कर दिया. शुक्रवार (11 सितंबर) को मीडिया में खबर आई तो जिलाधिकारी छिरिड वाई भूटिया ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है. संबंधित सभी डॉक्टरों को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है. 24 घंटे के अंदर उन्हें जबाब देना है.
तेजस्वी ने सरकार और प्रधानमंत्री पर किया हमला
तस्वीर सामने आने के बाद तेजस्वी यादव ने शुक्रवार (11 सितंबर, 2026) को एक्स पर पोस्ट करते हुए राज्य की सरकार और प्रधानमंत्री पर हमला किया. तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि बिहार की वित्तीय स्थिति इतनी बदतर है कि अब सरकार के पास जिला अस्पताल में पैर के फ्रैक्चर पर प्लास्टर लगाने के भी पैसे नहीं बचे?
बिहार की वित्तीय स्थिति इतनी बदतर है कि अब सरकार के पास जिला अस्पताल में पैर के फ्रैक्चर पर प्लास्टर लगाने के भी पैसे नहीं बचे?
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) September 11, 2026
स्वास्थ्य व्यवस्था की इससे दयनीय स्थिति क्या होगी कि राजधानी पटना से मात्र 45 किलोमीटर दूर स्थित जिला सदर अस्पताल, जहानाबाद में कार्डबोर्ड (गत्ते) से… pic.twitter.com/2MLP99ging
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उन्होंने कहा कि हमने 17 महीनों के अल्प कार्यकाल में अपनी इच्छा शक्ति और जुनून के बल पर बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में गुणात्मक परिवर्तन किया था लेकिन अब बिहार का स्वास्थ्य विभाग उन सुधारात्मक नीतियों और निर्णयों का क्रियान्वयन नहीं कर पा रहा है. स्वास्थ्य विभाग खुद ही आईसीयू में है.
उन्होंने कहा कि किसी राज्य के लिए इससे शर्मनाक बात क्या हो सकती है कि एक मरीज को प्लास्टर जैसी सबसे साधारण और जरूरी First Aid (प्राथमिक चिकित्सा) सुविधा भी ना मिले. 21 सालों से बिहार में NDA की सरकार है फिर भी चुनावों में प्रधानमंत्री बिहार आकर जंगलराज का रोना रोते हैं. बिना चुनाव तो इन स्वार्थी लोगों को बिहार से कोई मतलब नहीं. ऐसे कठपुतली यहां बैठा दिए है जिन्हें जनसरोकर से कोई मतलब नहीं.
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