बिहार में जब से ऑनलाइन अटेंडेंस की प्रक्रिया शुरू हुई है तब से कई जगहों से धांधली की खबरें आ रही हैं. इस बार बांका से मामला सामने आया है. 10 शिक्षकों को फर्जी तरीके से हाजिरी बनाने के आरोप में 'कारण बताओ' नोटिस थमा दिया गया है. स्थापना जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) संजय कुमार यादव की ओर से बीते मंगलवार (19 मई, 2026) को पत्र जारी करते हुए अलग-अलग स्कूलों में तैनात 10 शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है.
यह पूरा मामला ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज होने वाली उपस्थिति की विभागीय समीक्षा के दौरान सामने आया, जब अधिकारियों ने बीते 4 मई की अटेंडेंस रिपोर्ट की जांच की तो पाया कि इन 10 शिक्षकों की उपस्थिति बांका जिले की भौगोलिक सीमा से बाहर रहकर दर्ज की गई थी.
सात दिनों के भीतर देना होगा जवाब
जारी आदेश में साफ कहा गया है कि जिले की सीमा से बाहर होने के बावजूद पोर्टल पर हाजिरी दिखना यह साबित करता है कि शिक्षकों द्वारा फर्जी तरीके से सिस्टम को चकमा देने की कोशिश की जा रही थी. इन सभी चिह्नित शिक्षकों को पत्र मिलने के सात दिनों के भीतर साक्ष्य के साथ स्पष्टीकरण देने का अल्टीमेटम दिया गया है.
विभाग ने सख्त लहजे में पूछा है कि इस कृत्य के लिए क्यों न उनके खिलाफ विभागीय नियमावली के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए और उस दिन का वेतन काट लिया जाए. साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कार्रवाई तय है.
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इन शिक्षकों से मांगा गया स्पष्टीकरण
जिन शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, उनमें अमरपुर प्रखंड के एनपीएस अठमाहा के शिक्षक राजीव कुमार व आदर्श बालिका उच्च विद्यालय के राजन कुमार सिंह, बांका प्रखंड के यूएमएस बेलाटीकर के शिक्षक फैयाज कुमार, बाराहाट प्रखंड के यूएचएस सहरना के शिक्षक मोहम्मद महताब आलम, रजौन प्रखंड के मध्य विद्यालय मोरामा के शिक्षक कृष्णा नाथ ज्ञानेश व यूएमएस विद्यालय अलीपुर-धनियागड़िया के शिक्षक श्याम किशोर कुमार के अलावे शंभूगंज प्रखंड के अनुराग कुमार, रमेश कुमार, संदीप कुमार और शेखर कुमार को भी इस फर्जीवाड़े में लपेटे में लिया गया है.
बता दें कि इससे पूर्व भी बांका के दर्जनों शिक्षक इस तरह से फर्जी हाजिरी बनाने के खेल में फंस चुके हैं, इसके बावजूद कुछ शिक्षक अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं, जिसपर अब विभाग पूरी तरह सख्त हो चुका है.
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