टीएमसी के बागी नेताओं पर कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि जब ममता बनर्जी सत्ता में थी तो इन नेताओं को पार्टी के भीतर लोकतंत्र और तानाशाही के मुद्दे को उठाना चाहिए था. जब वो सत्ता से हट गईं तो सारी बुराइयां उनमें नजर आ रही हैं. ये वही स्थिति में जो हमने 1977 में देखा था. इंदिरा गांधी जब हारी थीं तो बड़े-बड़े नेता उनके खिलाफ बाहर निकल आए थे. बड़े नेताओं ने उनका साथ छोड़ दिया था. लेकिन फिर उन्होंने पार्टी को खड़ा किया.

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तारिक अनवर ने कहा, "ममता बनर्जी लड़ाका हैं. हो सकता है कि कहीं पर कुछ कमी रह गई हो, उसको सुधारने की जरूरत है. इस तरह पार्टी में जो भगदड़ मची है वो गलत हैं."

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के बयान पर तारिक अनवर ने कहा, "ये सारी बातें पार्टी के अंदर होनी चाहिए. अनुशासन में रहकर होना चाहिए. जब पार्टी क्राइसिस में है तो इस तरह की बातें करना, वो भी कल्याण बनर्जी जैसे व्यक्ति जो बहुत सीनियर लीडर हैं, उनसे ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती."

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मीनाक्षी नटराजन के मामले पर उन्होंने कहा कि ये बात तो साफ जाहिर हो गई कि एक तरफ झारखंड और एक तरफ मध्य प्रदेश का चुनाव था. झारखंड में उम्मीदवार सुधारने के लिए समय मिल गया और मध्य प्रदेश में नामांकन खारिज कर दिया जाता है. ये साफ तौर पर दिखाता है कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के इशारों पर काम कर रही है. जैसे भी हो विपक्ष को दबाने की कोशिश है.