पितृपक्ष मेले के दौरान मंगलवार (29 सितंबर 2026) को शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे गया पहुंचीं. उन्होंने अपने ससुर बाला साहेब ठाकरे और पिता का विधि-विधान से श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किया. पिंडदान के बाद स्मिता ठाकरे ने कहा कि गया की पावन धरती पर आकर पितरों का स्मरण करना उनके लिए सौभाग्य की बात है. उन्होंने बताया कि लंबे समय से गया आने की इच्छा थी, जो गुरु के आशीर्वाद से पूरी हुई.

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स्मिता ठाकरे ने कहा कि पिंडदान के बाद उनका मन भावुक हो गया. उन्होंने कहा कि पितरों को याद करते हुए कई बार ऐसा होता है कि कुछ पूर्वजों को हम भूल जाते हैं. गया में पूजा के दौरान उन्हें लगा कि सभी पितरों को स्मरण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई है.

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माता सीता की कथा से मिला पिंडदान का भरोसा

उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि महिलाएं पिंडदान नहीं करतीं. हालांकि, गुरु से माता सीता द्वारा गया में पिंडदान किए जाने की कथा सुनने के बाद उन्हें भरोसा मिला और उन्होंने खुद पिंडदान व तर्पण किया. उन्होंने सनातन धर्म को संस्कृति, कर्तव्य, समाजसेवा और जीवन जीने की परंपरा बताया.

राजनीति में आने के सवाल पर क्या बोलीं?

राजनीति में आने के सवाल पर स्मिता ठाकरे ने कहा कि वह हमेशा समाजसेवा करती रही हैं और आगे भी ऐसे काम करती रहेंगी, जिनसे लोगों का भला हो. उन्होंने कहा, "राजनीति में आना-जाना हमारे हाथ में नहीं है, समाजसेवा करना हमारे हाथ में है." उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर कुर्सी भी महत्वपूर्ण हो सकती है और अगर चाहेंगे तो वह भी कर लेंगे. उन्होंने हिंदुत्व के प्रचार की बात भी कही.

पितृपक्ष मेले में उमड़ रहे श्रद्धालु

गया में चल रहे पितृपक्ष मेले के तीसरे दिन तक करीब 9 लाख तीर्थयात्रियों के पहुंचने की खबर है. 15 दिनों तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और विभिन्न पिंडवेदियों पर पिंडदान व तर्पण करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गया में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष और उद्धार की प्राप्ति होती है.

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