बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के नतीजों में सहरसा जिले के बनगांव ने एक अनोखा कमाल कर दिखाया है. यहां एक ही परिवार के दो बच्चों (मौसेरे भाई-बहन) ने एक साथ BPSC परीक्षा पास कर पूरे इलाके का मान बढ़ाया है. शिवम और श्वेता की इस शानदार कामयाबी से न सिर्फ उनके परिवार में, बल्कि पूरे बनगांव में जश्न और खुशी का माहौल है. इन दोनों की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं.
आटा चक्की और 24 घंटे की अस्पताल ड्यूटी का संघर्ष
इन दोनों भाई-बहन की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का कड़ा संघर्ष छिपा है. श्वेता के पिता पिछले 25-30 वर्षों से गांव में ही आटा चक्की चलाकर अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं. वहीं, शिवम की मां ममता देवी एक निजी क्लिनिक (गंगा अस्पताल) में नर्स का काम करती हैं.
ममता देवी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया, "खुशी की कोई सीमा नहीं है. बच्चों ने बहुत मेहनत की है और उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए हमें भी कड़ा संघर्ष करना पड़ा. मैंने अस्पताल में दिन-रात 24-24 घंटे की ड्यूटी करके उन्हें पढ़ाया है, आज वह मेहनत सफल हो गई."
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घर से की तैयारी, भाई ने किया गाइड
अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए श्वेता ने बताया कि यह सफर उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा गांव से ही पूरी की और उसके बाद 'काशी विश्वविद्यालय' (BHU) से स्नातक की डिग्री हासिल की. श्वेता ने BPSC की तैयारी के लिए बाहर जाने के बजाय घर पर ही रहकर पढ़ाई की.
इस तैयारी में उनके मौसेरे भाई शिवम ने उनकी बहुत मदद की. शिवम खुद पिछले कई वर्षों से जनरल कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रहे थे और वर्तमान में सचिवालय में सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) के पद पर कार्यरत हैं. दोनों भाई-बहन ने एक साथ मिलकर पढ़ाई की, और जहां भी श्वेता को दिक्कत होती, शिवम उनकी मदद करते थे.
अब UPSC क्रैक कर DM-SP बनने का है सपना
आटा चक्की चलाकर बच्चों को इस मुकाम तक पहुंचाने वाले पिता का सीना आज गर्व से चौड़ा है. उन्होंने कहा कि संघर्ष से ज्यादा यह माता रानी की कृपा और बच्चों की लगन का फल है. इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके बच्चे अगले साल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा भी पास करेंगे और DM या SP बनकर देश की सेवा करेंगे.
बनगांव के इन दोनों होनहारों ने साबित कर दिया है कि अगर दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार का पूरा सपोर्ट हो, तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है.
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