रोहतास के बीएसएफ जवान राजनाथ पासवान का पार्थिव शरीर शुक्रवार (02 अक्टूबर, 2026) की सुबह उनके गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया. शिवसागर प्रखंड के घटीकन गांव के लोग सन्न रह गए. किसी ने सोचा नहीं था कि तिरंगे में लिपटकर किसी दिन राजनाथ पासवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा.

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राजनाथ पासवान असम के गोलाघेरा, सिलचर में बीएसएफ में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे. बीते गुरुवार को ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया. शुक्रवार को जैसे ही जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया. परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े. 

फरवरी 2027 में होने वाले थे सेवानिवृत्त 

बताया गया कि राजनाथ पासवान फरवरी 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले थे लेकिन परिवार के साथ समय बिताने से पहले ही उनका निधन हो गया. रिटायरमेंट से चार महीने पहले हुई इस घटना से परिवार स्तब्ध है. 

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मिलनसार व्यक्ति थे राजनाथ पासवान

ग्रामीणों के अनुसार राजनाथ पासवान काफी मिलनसार और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे. जब भी गांव आते थे, लोगों से सहजता से मिलते-जुलते थे. उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है. बीएसएफ के अधिकारियों की मौजूदगी में राजनाथ पासवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाया गया. राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा. 

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स्वागत की जगह मिली अंतिम विदाई 

घटीकन गांव के कुछ लोगों ने बताया कि सोचा गया था कि फरवरी 2027 में सेवानिवृत्ति के बाद राजनाथ पासवान जब घर लौटेंगे तो उनका स्वागत होगा. परिवार भी उनके साथ अधिक समय बिताने का इंतजार कर रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. स्वागत की जगह अब अंतिम संस्कार में लोग शामिल होंगे. जिस गांव में कुछ महीने बाद उनके लौटने पर खुशी का माहौल बनना था, उसी गांव में शुक्रवार को तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देने के लिए लोग उमड़ पड़े.

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