बिहार की राजनीति में मंत्री दीपक प्रकाश के पद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भाजपा और एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र और बिहार की एनडीए सरकार से संवैधानिक जवाब मांगा है.

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रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में लिखा कि क्या संविधान सर्वोच्च न्यायालय से ऊपर है भाजपा और एनडीए? उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह सवाल उठाया जाना कि कोई व्यक्ति छह महीने तक बिना विधायक या एमएलसी बने मंत्री पद पर कैसे रह सकता है, यह एनडीए सरकार की संवैधानिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार को इस मामले पर तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर संवैधानिक प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा हुआ है.

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SR चौधरी केस का हवाला देकर साधा निशाना

रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2001 के एसआर चौधरी बनाम पंजाब राज्य मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया था कि छह महीने की संवैधानिक सीमा को किसी भी राजनीतिक तरीके से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारों द्वारा संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी की जा रही है और सत्ता को संविधान से ऊपर समझा जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से मांगा जवाब

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने बिहार सरकार से सवाल किया कि जब दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य, तो वह छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं?

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता और व्हिसलब्लोअर राकेश कुमार सिंह की ओर से दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर बिहार सरकार को नोटिस जारी किया था. याचिका में बिहार में नई एनडीए सरकार बनने के बाद दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी गई है.

कौन हैं दीपक प्रकाश?

दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं. बिहार सरकार में उन्हें पंचायती राज मंत्री बनाया गया है. अब उनके मंत्री पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. फिलहाल मामले में बिहार सरकार के जवाब का इंतजार है. वहीं, विपक्ष इसे संवैधानिक संकट बताते हुए एनडीए सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है.