आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की सुरक्षा घटा दी गई है. पहले उन्हें जेड कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी लेकिन अब वे वाई प्लस सुरक्षा घेरे में होंगे. सुरक्षा घटाए जाने पर राजनीति शुरू हो गई है. इस बीच आरजेडी सांसद मनोज झा ने इस पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है. शुक्रवार (23 जनवरी, 2026) को मनोज झा ने एक्स पर इस संबंध में पोस्ट किया.

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उन्होंने लिखा, "लोकतंत्र में किसी की भी सुरक्षा व्यवस्था सत्ता में बैठे लोगों की इच्छा और उनकी राजनीतिक प्राथमिकताओं पर नहीं चल सकती. किसी व्यक्ति की सुरक्षा बढ़ाना या घटाना पेशेवर खतरा-मूल्यांकन, खुफिया इनपुट और नियमित समीक्षा पर आधारित होना चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा पर."

कमजोर होता है जनता का भरोसा: मनोज झा

अपने पोस्ट में मनोज झा आगे लिखते हैं, "औपचारिक रूप से भारत की सुरक्षा प्रणाली इसी सिद्धांत को मानती है लेकिन जब सुरक्षा में बदलाव बिना लिखित कारण, स्पष्ट मानकों और सार्वजनिक रूप से समझाए गए आधार के किए जाते हैं, तो यह आशंका पैदा होती है कि सुरक्षा अब जोखिम प्रबंधन नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत का माध्यम बन रही है. इससे न केवल संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा प्रभावित होती है, बल्कि संस्थाओं पर जनता का भरोसा भी कमजोर होता है.

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उन्होंने यह भी कहा कि एक विश्वसनीय व्यवस्था के लिए पारदर्शी प्रोटोकॉल, तर्कसंगत आदेश और स्वतंत्र निगरानी आवश्यक है. सुरक्षा न तो निष्ठा का इनाम है और न ही असहमति की सजा-यह प्रमाणों पर आधारित राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है.

कई नेताओं की सुरक्षा हटाई गई

बता दें कि तेजस्वी यादव की सुरक्षा जहां घटी है वहीं दूसरी ओर बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और एमएलसी मदन मोहन झा, बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार, आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं विधानसभा के पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी की वाई श्रेणी की सुरक्षा हटा ली गई है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई है. केंद्रीय मंत्री और सांसद ललन सिंह, स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी नेता मंगल पांडेय को जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई है.

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