'CM योगी की तो मजबूरी है', यूपी विधानसभा के विशेष सत्र बुलाने पर RJD नेता मनोज झा का बयान
UP Assembly Session: उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है, इस पर सियासत तेज हो गई है. इसे लेकर अब राजद सांसद मनोज झा ने निशाना साधा है.

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है. 30 अप्रैल से यूपी विधानसभा में विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया गया है. इस बीच आरजेडी सांसद मनोज झा की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि सीएम योगी की तो मजबूरी है. जिनसे कंपटीशन है उनके समकक्ष खड़ा होने की कोशिश होगी, लेकिन ये पाखंड क्यों कर रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि महिला आरक्षण बिल 16 तारीख की मध्य रात्रि को अधिसूचित हो चुका है. उन्होंने कहा कि आप केंद्र में सत्र बुलाइए और कहिए कि बिना परिसीमन के हम इस को लागू करने जा रहे हैं. इस पर विपक्ष ने ब्लैंक चेक दे रखा है. सबकी इस पर सहमति है और सब तैयार हैं.
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लेकिन इस पर हम लोगों की छोटी सी मांग है कि कोटा के अंदर कोटा (Quota Within Quota) उस पर सहमति दीजिए और आगे बढ़िए. उन्होंने कहा कि यह जो नोटंकी चल रही है हमने पहले भी देखी है. यह लोग चूक गए हैं. इनके बस में कुछ भी नहीं बचा है. मैं समझता हूं कि बौद्धिक तंगहाली की पराकाष्टा है.
ओवैसी के विभाजन वाले बयान पर क्या बोले मनोज झा?
असदुद्दीन ओवैसी के विभाजन वाले बयान पर मनोज झा ने कहा कि इस देश में विचित्र संयोग या दुरयोग हो गया है. विभाजन पर लोग अब इतिहासकारों को नहीं पढ़ते हैं. इस पर नेता बयान दे रहे हैं. कभी अमित शाह तो कभी ओवैसी बोलते हैं. विभाजन एक दर्दनाक अध्याय है. विभाजन में कैसे हमारा आजादी का आंदोलन तब्दील हुआ इसके लिए पढ़ने की जरूरत होती है. व्हाट्सएप मैसेज को कोई नहीं समझ पाता है.
उन्होंने आगे कहा कि अभी जो देश में मानसिक विभाजन चल रहा है जो दूरियां बढ़ रही हैं. उसको पाटने के लिए हम लोग क्या कर रहे हैं. क्योंकि बंटवारा सिर्फ सरहद पर नहीं होता है. अगर गलियां, गांव, शहर बंट जाए वो जरूरी है. लेकिन ये कार्यसूची चलती रहेगी और देश टुकड़ों-टुकड़ों में मानसिक क्षत-विक्षत होता रहेगा.
पीएम मोदी के संबोधन पर दी यह प्रतिक्रया
प्रधानमंत्री मोदी के महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज झा ने कहा कि प्रधानमंत्री खाली हो गए हैं. बौद्धिक रूप से उनके पास कहने के लिए कुछ भी नया नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी शायद नहीं जानते हैं कि वह बिल पहले से ही लागू है, जिसे 16 अप्रैल की मध्यरात्रि को अधिसूचित किया गया था और जो 16 अप्रैल, 2026 से प्रभावी है.
तो फिर चिंता किस बात की है, प्रधानमंत्री जी? समस्या यह है कि आपने इसे पाखंड में तब्दील कर दिया है. आप इलेक्टॉरल मैप के बदलाव में लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे थे. पूरा विपक्ष आपको खुली छूट दे रहा है. हम सब कह रहे हैं.
उन्होंने कहा कि कोटे के अंदर कोटा लागू करें, एक दिवसीय सत्र बुलाएं और आगामी सभी चुनावों में इसे तुरंत लागू करें. इसमें क्या मुश्किल है? मुद्दा यह है कि आपकी नीयत साफ नहीं है, प्रधानमंत्री जी. और जिन महिलाओं का आप हवाला दे रहे हैं, वे भी आपकी असली मंशा से वाकिफ हैं.
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Source: IOCL

























