बिहार में मुजफ्फरपुर के सबसे बड़े अस्पताल में आग लगने से तीन लोगों की मौत हो गई. प्रसाद अस्पताल के ICU में 13 से 15 मरीज भर्ती थे. यहां शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी आग के बाद धुआं फैल गया और पहले से गंभीर हालत में भर्ती मरीजों की स्थिति और खराब हो गई. सभी मरीजों को फायर डिपार्टमेंट ने रेस्क्यू कर बाहर निकाला, जिनमें से 3 की मौत हो गई जबकि बाकियों को तत्काल प्रभाव से दूसरे अस्पतालों में भेजा गया. इस हादसे पर अब बिहार के सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने नाराजगी जताई है और कड़ी कार्रवाई की बात कही है. 

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मुजफ्फरपुर के अस्पताल में लगी आग पर रामकृपाल यादव भड़क गए. उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. यहां कुकुरमुत्ते की तरह अस्पताल खुले हैं. कोई भी आदमी अस्पताल खोल लेता है लेकिन मानकों का पालन नहीं किया जाता. 

'किसी निर्दोष की जान नहीं जानी चाहिए'

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बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि जो अस्पताल मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, उन्हें तुरंत बंद कर देना चाहिए. किसी निर्दोष की जान नहीं जानी चाहिए. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. 

ICU में भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने क्या बताया?

एक मरीज के तीमारदार ने बताया कि वह घर पर थे जब उन्हें आग की सूचना मिली. वह तुरंत अस्पताल आए और अपने परिचित को वहां से निकाल कर दूसरे अस्पताल में ले गए. अब उनकी हालत स्थिर है. 

'मेरे मरीज को सीढ़ियों पर फेंककर चला गया था स्टाफ'

सुबह मालूम चला कि वहां शॉर्ट सर्किट से आग लगी. हम अपने परिचित को देखने गए तो वो अपने बेड पर नहीं थे. बाहर आकर हमने गार्ड से पूछा तो वह कोई जवाब नहीं दे पा रहा था. लोगों से मदद लेने की कोशिश की तो वहां अस्पताल से जुड़ा कोई व्यक्ति मौजूद ही नहीं था. अंत में जाकर हम खुद ही टॉर्च मारकर खोजे. वहां धुआं-धुआं हो रखा है. ऑक्सीजन की भारी कमी थी. कई लोग मर गए थे, लेकिन मेरे परिचित वहां नहीं थे. 

तीमारदार का दावा है कि उसके परिचित मरीज को सीढ़ी पर फेंककर अस्पताल का स्टाफ वहां से चला गया था. हम खुद अपने मरीज को लेकर दूसरे अस्पताल गए.