बिहार में सोमवार (16 मार्च) को राज्यसभा चुनाव में सभी पांच सीट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने जीत हासिल की. मतदान के दौरान विपक्षी महागठबंधन के चार विधायकों की गैरहाजिरी से राजनीतिक समीकरण बदल गया, जिससे NDA को निर्णायक बढ़त मिल गई. चुनाव में NDA के उम्मीदवार जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रथम वरीयता के 44 वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भी 44 मत प्राप्त हुए. वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा को 42 और JDU के रामनाथ ठाकुर को भी 42 वोट मिले.

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आरजेडी उम्मीदवार को कितने वोट मिले?

महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को केवल 37 वोट मिले. इसके बाद द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती में BJP के उम्मीदवार शिवेश राम की जीत के साथ ही पांचवीं सीट भी NDA के खाते में चली गई. गौरतलब है कि राज्य में विधायकों की संख्या और निर्धारित फार्मूले के तहत जीत के लिए 41 विधायकों के मतों की आवश्यकता थी.

बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर

राज्यसभा चुनाव के बहाने बिहार की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला. चुनावी गणित जहां महागठबंधन के पक्ष में जाता हुआ दिखाई दे रहा था, वहीं मतदान के दिन चार विधायकों की गैरहाजिरी ने पूरा समीकरण बदल दिया. नतीजतन NDA ने पांचों सीटों पर जीत हासिल की और महागठबंधन की रणनीति विफल हो गई.

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पांचवीं सीट सबसे अधिक चर्चा में रही

इस चुनाव में पांचवीं सीट सबसे अधिक चर्चा में रही, क्योंकि यहां मुकाबला बेहद कांटे का माना जा रहा था. इस सीट को जीतने के लिए NDA को तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी, जबकि महागठबंधन को छह विधायकों के वोट की जरूरत थी.

महागठबंधन की ओर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संख्या जुटाने के लिए रणनीति बनाई थी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच विधायकों तथा मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक विधायक का समर्थन भी हासिल कर लिया था.

महागठबंधन को पांचवीं सीट पर था जीत का भरोसा

संख्याबल के इस समीकरण के बाद महागठबंधन को भरोसा था कि पांचवीं सीट उसके खाते में जाएगी, लेकिन मतदान के समय उसके चार विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे और यहीं से पूरा समीकरण बदल गया.

महागठबंधन के किन विधायकों ने नहीं की वोटिंग

मतदान से अनुपस्थित रहने वालों में कांग्रेस के तीन विधायक वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र कुशवाहा, फारबिसगंज से मनोज विश्वास और मनिहारी से मनोहर सिंह जबकि आरजेडी के ढाका से विधायक फैजल रहमान शामिल हैं. इन चार वोटों की कमी ने महागठबंधन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया और NDA को निर्णायक बढ़त मिल गई.

तेजस्वी यादव ने लगाया ये आरोप

महागठबंधन ने चुनाव परिणाम को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. आरजेडी नेताओं का कहना है कि उनके विधायकों को खरीद लिया गया या उन्हें मतदान से दूर रखने की साजिश रची गई. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने परिणाम के बाद कहा कि उनके चार विधायक मतदान नहीं कर सके और पूरे बिहार को पता है कि ऐसा क्यों हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि BJP धनबल और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल करती है, जिसके कारण यह परिणाम सामने आया.

अमरेंद्र धारी सिंह ने क्या कहा?

आरजेडी उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह ने भी आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त हुई है और सत्ता का दुरुपयोग किया गया. उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए धनबल का इस्तेमाल किया गया, जिससे चुनाव का परिणाम प्रभावित हुआ. उधर महागठबंधन के विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि इस घटना से देश की राजनीति में धनबल के इस्तेमाल की सच्चाई उजागर हो गई है. उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया में शामिल न होने वाले विधायकों ने जनता के साथ विश्वासघात किया है.