राज्यसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से अधिसूचना जारी हो गई है. नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होगी और मतदान 16 मार्च को होगा. बिहार की बात की जाए तो राज्यसभा के जिन पांच सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें से दो जेडीयू से, एक आरएलएम से और दो आरजेडी से हैं. जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, पार्टी के सामने दुविधा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर की उम्मीदवारी को लेकर है. दोनों ही नेता राज्यसभा में दो कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. 

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वरिष्ठ नेता के मुताबिक, पिछली बार पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को पार्टी ने राज्यसभा में तीसरे कार्यकाल के लिए उम्मीदवार बनाने से इनकार कर दिया था. उनके मुताबिक, तब यह कहा गया था कि पार्टी राज्यसभा में किसी को भी दो से ज्यादा कार्यकाल दिए जाने के पक्ष में नहीं है. बिहार में संख्या बल के हिसाब से राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव में विपक्ष को एक भी सीट पर जीत मिलने की संभावना नहीं है. 

…तब दिया गया था नीति का हवाला

दरअसल, जेडीयू प्रमुख और राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कुछ वर्ष पहले पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को लगातार तीसरा कार्यकाल देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था. पार्टी ने उस समय यह तर्क दिया था कि लगातार दो से अधिक कार्यकाल के लिए किसी को राज्यसभा नहीं भेजना उसकी नीति है. हालांकि, इस बार जेडीयू के कदम को लेकर पार्टी सूत्र भी चुप्पी साधे हुए हैं, क्योंकि नीति का पालन करने पर दोनों मौजूदा सांसद अपने संवैधानिक पद खो देंगे.

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क्या कहता है मौजूदा गणित?

राज्यसभा चुनाव के मौजूदा गणित के अनुसार, एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 40 वोटों की जरूरत होगी. पिछले नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में राजग को 202 सीटें मिली थीं, जबकि आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन को कुल मिलाकर 35 सीटों पर ही सिमटना पड़ा था. 

बता दें कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की तीसरी सीट उपेंद्र कुशवाहा के पास है, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं. वह 2025 में बीजेपी के समर्थन से उपचुनाव में राज्यसभा पहुंचे थे. यह उपचुनाव विवेक ठाकुर के लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद हुआ था. 

कुशवाहा को मिल चुका पर्याप्त लाभ

हालांकि, कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा अहम सहयोगी पार्टी है, जो कोइरी जैसे प्रभावशाली पिछड़े वर्ग के वोटों का दावा करती है, लेकिन एनडीए के सूत्र मानते हैं कि कुशवाहा को पर्याप्त राजनीतिक लाभ मिल चुका है. उनके पुत्र दीपक प्रकाश को विधायक या विधान परिषद सदस्य न होते हुए भी, राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिल चुकी है. बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में दीपक प्रकाश की पार्टी के पास केवल चार विधायक हैं, जिनमें उनकी मां स्नेहलता भी शामिल हैं. ऐसे में उन्हें जेडीयू और बीजेपी जैसे बड़े सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर रहना होगा. 

नितिन नवीन भेजे जा सकते हैं राज्यसभा

दूसरी ओर अटकलें हैं कि एनडीए की ओर से बीजेपी के उम्मीदवारों में एक नाम नितिन नवीन का हो सकता है, जिन्हें पिछले महीने पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. नवीन ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद दिसंबर में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन वह अभी भी बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं. माना जा रहा है कि नई जिम्मेदारियों को देखते हुए वह अपनी सीट छोड़ सकते हैं. 

एनडीए में एक और दावेदार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) हो सकती है, जिसके प्रमुख केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान हैं. पार्टी ने पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में 28 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतीं, जिनमें से दो विधायकों को राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिली है. इस बीच, एनडीए सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव से पहले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की ओर से भी असंतोष की आवाज उठ सकती है. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के पास विधानसभा में पांच विधायक हैं, जिनमें संतोष की पत्नी और सास भी शामिल हैं.