बिहार में SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ महागठबंधन के लोकभवन मार्च के दौरान हिरासत में लिए गए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला. पुलिस द्वारा रिहा किए जाने के बाद राजेश राम ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए वोट के अधिकार से लोगों को वंचित किया गया और इसी प्रक्रिया के माध्यम से बिहार में सरकार बनवाई गई. हालांकि, ये आरोप कांग्रेस नेता ने लगाए हैं.

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राजेश राम ने कहा कि महागठबंधन के नेता शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे. पहले राज्यपाल से मुलाकात हुई और इसके बाद लोकभवन की ओर मार्च किया गया. वहां से लौटने के दौरान जब वे कोतवाली थाने के पास पहुंचे तो बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे.

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‘SIR के जरिए चोरी करके सरकार बनवाई’

राजेश राम ने आरोप लगाया कि “ज्ञानेश कुमार ने SIR के माध्यम से चोरी करके बिहार में सरकार बनवाई है.” उन्होंने कहा कि विपक्ष मतदाता सूची और वोट के अधिकार से जुड़े सवालों को लेकर प्रदर्शन कर रहा है. विपक्षी दल SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

‘पुलिस को मुख्यमंत्री आवास से आया आदेश’

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि लोकभवन से लौटने के बाद पुलिस ने अचानक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को मुख्यमंत्री आवास से उन्हें और अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का आदेश मिला था. राजेश राम ने कहा कि हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई क्यों की जा रही है, इसकी जानकारी उन्हें भी नहीं थी.

हाथ में संविधान, बोले- वोट के अधिकार की लड़ाई

रिहाई के बाद राजेश राम हाथ में संविधान लेकर पहुंचे. उन्होंने कहा कि विपक्ष संविधान की लड़ाई लड़ रहा है. उन्होंने इसे “संविधान की मुक्ति की लड़ाई” बताते हुए कहा कि जिन लोगों से वोट देने का अधिकार छीना गया है, उनके मताधिकार की लड़ाई भी यह आंदोलन है.

जिला मुख्यालयों पर भी प्रदर्शन

महागठबंधन ने बिहार के जिला मुख्यालयों पर भी प्रदर्शन किया. पटना में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लोकभवन मार्च निकाला गया. मार्च के दौरान पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया. विपक्ष का कहना है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच होनी चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाना चाहिए.

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