मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर की प्रक्रिया से नाराज विपक्ष के प्रदर्शन के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सनसनीखेज दावा किया है. प्रशांत किशोर ने कहा है कि चुनाव आयोग सत्ता में बैठे हुए दल की मदद करता है. पीके बुधवार (14 अक्टूबर, 2026) को बिहार के सुपौल में थे.
प्रशांत किशोर ने कहा, "वोट चोरी जो शब्द है वो किसी एक व्यक्ति एक दल का मुद्दा हो सकता है… लेकिन समाज में, देश में, लोगों का एक बड़ा तबका चुनावों की जो प्रक्रिया है… चुनाव आयोग की जो कार्यशैली है उससे संतुष्ट नहीं है."
चुनाव आयोग की कार्यशैली पर उठाया सवाल
प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले 8-10 सालों में जिस तरह से चुनाव कराए जा रहे हैं, जिस तरीके से चुनाव आयोग वोटर लिस्ट बनाता है चाहे वह फॉर्म-6 हो या 7 हो, जिस तरीके से एसआईआर के जरिए लोगों का नाम काटा गया है, जैसे चुनाव में पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाते हैं, जिस पद्धति से आचार संहिता को लागू कराया जाता है, ऐसा मालूम पड़ता है कि हर जगह चुनाव आयोग सत्ता में बैठे हुए दल की मदद करता है, इसलिए आज समाज का एक बड़ा वर्ग है जो चुनाव आयोग की कार्यशैली से खुश नहीं है, वही आपको प्रदर्शन के तौर पर दिख रहा है.
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होते रहेंगे इस तरह के प्रदर्शन: पीके
पीके ने एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि ये प्रदर्शन रुकने वाला नहीं है. ये किसी एक व्यक्ति या दल का मामला नहीं है. देश में लोकतंत्र की शुद्धता का मामला है. जब तक चुनाव आयोग की कार्यशाली में पारदर्शिता वाली सुधार नहीं होगी तो इस तरह के प्रदर्शन होते रहेंगे.
प्रशांत किशोर कोसी स्नातक विधान परिषद चुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार रजनीश रंजन के समर्थन में जनसभा के लिए सुपौल पहुंचे थे. इस मौके पर मतदाताओं से अपील की कि वे जाति, धर्म और राजनीतिक भय से ऊपर उठकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें.
सम्मेलन में प्रशांत किशोर ने क्षेत्र के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने की व्यवस्था करने का वादा किया. उन्होंने बिहार के विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ दिलाने की बात भी कही.
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