पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के रूट को लेकर समस्तीपुर के सरायरंजन क्षेत्र में एक बड़ा विवाद सामने आया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में आने से एक्सप्रेस-वे के रूट को बदला गया है. इस मामले में बुधवार (17 जून, 2026) को पटना में जन सुराज पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई. 

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पार्टी की ओर से 10 सवालों को उठाया गया है और सम्राट सरकार से जवाब मांगा गया है. हालांकि बीते मंगलवार (16 जून, 2026) को ही पथ निर्माण विभाग की ओर से बयान जारी कर ऐसी खबरों को भ्रामक बताया गया था.

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नीचे पढ़ें जन सुराज के 10 सवाल

  • यदि रूट में कोई बदलाव नहीं हुआ तो सरकार का मूल डीपीआर, प्रारंभिक अलाइंमेंट व अंतिम स्वीकृति अलाइंमेंट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?
  • सरकार बताए कि सरायरंजन क्षेत्र के प्रभावित लोगों की आपत्तियों पर कितनी सुनवाई हुई व क्या जवाब दिया?
  • सरकार इस बात की स्वतंत्र जांच कराने को तैयार है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक हस्ती के दबाव में रूट बदला है या नहीं?
  • यदि 150 से अधिक घर-दुकानें व एक कॉलेज का हिस्सा प्रभावित हो रहा है तो इसके वैकल्पिक मार्गों का अध्यन किया गया है या नहीं?
  • भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कौन-कौन से दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं?
  • क्या सरकार प्रभावित परिवारों की सूची, मुआवजा दर, पुनर्वास योजना के दस्तावेज को सार्वजनिक करेगी? 
  • यदि रूट परिवर्तन का आरोप गलत है तो सरकार स्वतंत्र तकनीकी समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है?
  • क्या बिहार में विकास परियोजना का उद्देश्य जनता को सुविधा देना है या कुछ प्रभावशाली लोगों के हितों की रक्षा करना है?
  • सरकार बताए कि परियोजना के तकनीकी आधार पर रूट तय हुआ है या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर?
  • क्या मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री पूरे मामले की न्यायिक या उच्च जांच की मांग का समर्थन करेंगे?

बता दें कि सरायरंजन के 24 से अधिक मकान मालिकों-दुकानदारों ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर शिकायत की है. आरोप ये है कि किसी खास व्यक्ति की 10.5 बीघा जमीन प्रोजेक्ट की जद में जा रही थी, जिसके बाद प्रोजेक्ट में बदलाव किया गया. अब इससे 7 गांव, 150 मकान, कुछ दुकानें, केदार संत रामाश्रय कॉलेज का कुछ भाग प्रभावित है.

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