बिहार के चर्चित टेंडर माफिया रिशु श्री उर्फ रिशु रंजन सिन्हा की गिरफ्तारी के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. विशेष निगरानी इकाई (SVU) द्वारा 28 मई को गिरफ्तार किए गए रिशु श्री को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया है.

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265 करोड़ की संपत्ति और टेंडर घोटाले का बड़ा मामला

रिशु श्री पर टेंडर हेराफेरी, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप हैं. आरोप है कि उसने अपनी कंपनियों को सरकारी ठेके दिलवाने के लिए अधिकारियों को रिश्वत दी और कई IAS अधिकारियों की पोस्टिंग भी प्रभावित की. ED की जांच में भी उसके कई बड़े IAS अधिकारियों से संबंध सामने आए हैं. 

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कांग्रेस ने उठाए सवाल, बोली- “IAS अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई?”

रिशु श्री की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर हमला बोल दिया है. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कहा, “एक टेंडर माफिया अधिकारियों की पोस्टिंग तय करता था, टेंडर दिलवाता था और कमीशन बांटता था. फिर भी सरकार चुप है. जिन IAS अधिकारियों के नाम रिशु श्री से जुड़े हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?” उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तुरंत ऐसे अधिकारियों को हटाएं जिनका नाम इस घोटाले में आ रहा है. राठौड़ ने कहा कि एक आम MLA या दरोगा भी ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं करवा सकता, फिर रिशु श्री जैसे व्यक्ति इतना प्रभाव कैसे चला पाता था?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब रिशु श्री को रिमांड पर लेने की कोशिश कर रहा है. सघन पूछताछ में और बड़े अधिकारियों के नाम सामने आने की संभावना है. रिशु श्री की गिरफ्तारी बिहार में टेंडर माफिया और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करती है. विपक्ष इस मामले को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे एक व्यक्ति विशेष का मामला बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश में लगा है.

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