बिहार की राजधानी पटना में 'आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ; आंदोलन को लेकर एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. 'आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ' संघर्ष समिति ने गांधी मैदान से लोक भवन घेराव का आह्वान किया है. आंदोलन में दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के लोगों के सड़क पर उतरने की बात कही गई है.

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प्रदर्शनकारियों को डाकबंगला चौराहा से आगे बढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन की ओर से तैयारी की जा रही है. यहां पहली बार कांटेदार तार लगाए जाने का मामला सामने आया है. डाकबंगला चौराहा पटना में होने वाले बड़े प्रदर्शनों के दौरान प्रमुख बैरिकेडिंग प्वाइंट रहा है. आसपास मेट्रो निर्माण का काम भी चल रहा है.

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यहीं रोके जाते हैं प्रदर्शनकारी

प्रशासन की कोशिश रहती है कि प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहा से आगे न बढ़ें. पिछले आंदोलनों के दौरान भी इसी इलाके में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी है. कई मौकों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं.

जानलेवा हो सकता है इंतजाम, उठे सवाल

अब कांटेदार तार लगाए जाने की तैयारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान भीड़ बढ़ने की स्थिति में ऐसे अवरोध से भगदड़ या चोट का खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर प्रशासन से सावधानी बरतने की मांग उठ रही है. 

पहले भी डाकबंगला बना है आंदोलन का केंद्र

पटना का डाकबंगला चौराहा पहले भी कई बड़े आंदोलनों का केंद्र रहा है. हाल के दिनों में तेजस्वी यादव के लोक भवन मार्च और छात्रों के आंदोलनों के दौरान भी यहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा घेरा बनाया था. अब 'आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ' आंदोलन के आह्वान के बाद प्रशासन की तैयारियां बढ़ गई हैं. गांधी मैदान से लोक भवन तक प्रस्तावित मार्च को देखते हुए डाकबंगला पर सुरक्षा-व्यवस्था अहम मानी जा रही है.

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