पटना: एलजेपी में टूट की खबरों के बीच दिवंगत नेता रामविलास पासवान के भाई और सांसद पशुपति पारस सोमवार को पत्रकारों से मुखातिब हुए. बातचीत के दौरान उन्होंने खुद पर लग रहे सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा, " कल का फैसला मजबूरी में लिया गया फैसला है. तीनों भाइयों में अटूट प्रेम है. 28 नवंबर, 2000 को एलजेपी का गठन हुआ था. अब पार्टी को 21 वर्ष हो गए हैं."


असामाजिक तत्वों के कारण गठबंधन टूट गया


उन्होंने कहा, " दलित पिछड़ों की आवाज बनना और उनकी मदद करना दिवंगत नेता रामविलास पासवान का सपना था. इसलिए ही वो एनडीए में शामिल हुए थे, पर कुछ असामाजिक तत्वों के कारण मौजूदा समय में पार्टी में 99 प्रतिशत कार्यकर्ता-सांसद नाराज थे. सभी की इच्छा थी कि चुनाव में हम एनडीए गठबंधन के पार्ट बने, पर कुछ असामाजिक तत्वों के कारण गठबंधन टूट गया."


पशुपति पारस ने कहा, " हमारी इच्छा है कि रामविलास पासवान की वाणी सदा अमर रहे. लेकिन गठबंधन नहीं होने की वजह से पार्टी कमजोर हो गई, साथ ही समाप्ति के कगार पर पहुंच गई. पार्टी के सांसदों का मत था कि पार्टी का अस्तित्व समाप्त हो रहा है और इसे बचाना होगा, इसके बाद ये फैसला लिया गया. इस तरह हमने पार्टी को तोड़ा नहीं, बचाया है."


चिराग पासवान से कोई शिकायत नहीं 


चिराग पासवान के संबंध में उन्होंने कहा, " चिराग हमारे भतीजे हैं और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं. हमें उसने कोई शिकवा-शिकायत नहीं है. वो चाहें तो पार्टी में रह सकते हैं. हमने पार्टी तोड़ी नहीं, बचाई है. रामविलास पासवान की आत्मा के शांति के लिए हम जबतक हैं, तबतक पार्टी जिंदा रहेगी. रविवार की रात साढ़े आठ बजे स्पीकर से हम पांच सांसदों मिलकर पत्र सौंपा है और जैसे ही निर्देश होगा आगे की कार्यवाही होगी. 


जेडीयू में जाने की खबर को गलत बताते हुए पशुपति पारस ने कहा कि हमारा अपना संगठन है, जो मजबूत है और आगे भी रहेगा. हम एनडीए गठबंधन के रहकर काम करेंगे. गठबंधन धर्म का पालन करेंगे. जहां तक बिहार की बात है तो मेरी सोच है कि नीतीश कुमार एक अच्छे लीडर हैं और मैं उन्हें विकास पुरूष मानता हूं.


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