भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से इस बार बिहार का गौरव बढ़ा है, जिसमें तीन प्रमुख हस्तियों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है. इसमें विश्व बंधु (मरणोपरांत),भरत सिंह भारती को कला के क्षेत्र में योगदान के लिए और डॉ गोपाल जी त्रिवेदी (मरणोपरांत)को विज्ञानं एवं इंजीनियरिंग में योगदान देने के लिए सम्मान मिला है.

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा गणतंत्र दिवस परघोषित 131 पद्म पुरुस्कारों में से 113 पद्मश्री पुरूस्कार शामिल हैं.पद्म पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में आयोजित किए जाते हैं. इस खबर के बाद बिहार में ख़ुशी का माहौल है.

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विश्व बंधु-लोक नृत्य में अग्रणी 

विश्व बंधु जी का जन्म 23 नवम्बर 1930 को  हुआ था. उन्होंने लोक नृत्य में अपना पूरा जीवन दिया. वे न सिर्फ एक दूरदर्शी नर्तक, कोरियोग्राफर और गुरु के रूप में उदय शंकर से प्रभावित होकर भारतीय शास्त्र, लोक और रचनात्मक नृत्य की नई भाषा विकसित की. यही नहीं उन्होंने बिहार के आधुनिक नृत्य आंदोलन को सामाजिक जागृति का माध्यम बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

भरत सिंह भारती-लोक गायक 

भरत सिंह भारती का जन्म 20 नवम्बर 1936 को भोजपुर जिले के नोनौर गांव में हुआ था. बचपन के दिनों से ही उन्होंने कीर्तन मंडलियों में गाना शुरू कर दिया था .तबला, हारमोनियम, बांसुरी, सितार समेत कई वाद्य यंत्रों में निपुण थे और 1962 से आकाशवाणी पटना से जुड़कर लोकसंगीत को आगे बढ़ाया.सात दशकों तक उन्होंने भोजपुरी संगीत की सेवा की.

डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी

डॉ. गोपाल त्रिवेदी का जन्म 15 फरवरी 1930 को हुआ. वे राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के पूर्व कुलपति रह चुके हैं.  पढ़ाई उन्होंने सबौर कृषि कालेज से की. इसके बाद IARI से पीएचडी की. उन्होंने कुलपति रहते हुए कृषि शिक्षा और प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया. 

यहां बता दें कि हर वर्ष खेल, शिक्षा, सामाजिक कार्य, साहित्य आदि क्षेत्रों में पद्म पुरस्कार दिए जाते हैं. इस बार कला और शिक्षा में बिहार को तीन पद्म पुरस्कार मिलना महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

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