बिहार में सियासी बदलाव पर विपक्षी दल ये दावा कर रहे हैं कि नीतीश कुमार को बीजेपी ने 'मजबूर' किया, इस वजह से वो राज्यसभा जा रहे हैं. इस बीच चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी(आर) के सांसद राजेश वर्मा ने कहा कि सब इस बात को जानते हैं कि सीएम नीतीश कुमार को कोई मजबूर करके तो निर्णय नहीं करवा सकता. उन्होंने स्वयं इस बार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सार्वजनिक किया. जब विपक्ष इस पर कह रहा है कि किसी और ने कराया तो मुख्यमंत्री आवास से खुद को नामांकन करने गए थे. अपनी समृद्धि यात्रा के सारे मंचों से कहा था कि नए लोगों के साथ बिहार आगे बढ़ेगा जिसमें उनका भी योगदान रहेगा. 

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नीतीश कुमार ने MLC पद से दिया इस्तीफा

गौरतलब है कि सोमवार (30 मार्च) को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया. 16 मार्च को नीतीश कुमार ने राज्यसभा का चुनाव जीता था. बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी और जनता दल (यूनाइटेड) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) संजय कुमार ने नीतीश कुमार का इस्तीफा विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा. 

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विधान परिषद के स्पीकर ने क्या कहा?

अवधेश नारायण सिंह ने कहा, “हां, मुझे नीतीश कुमार जी का विधान परिषद सदस्य पद से इस्तीफा प्राप्त हुआ है और इसे स्वीकार कर लिया गया है. उनकी परिषद की सीट को जल्द ही आधिकारिक रूप से रिक्त घोषित किया जाएगा.”

'नीतीश कुमार जैसा नेता न हुआ, न होगा'

जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, "बिहार में न कोई नीतीश कुमार जैसा दूसरा पैदा हुआ है और न कोई दिखाई पड़ रहा है. राजनीति में वे एक मानक के तौर पर जाने जाएंगे. कोई भी व्यक्ति अपनी कुर्सी एक दिन के लिए नहीं छोड़ता है. नीतीश कुमार ने मांझी को अपनी कुर्सी पर बैठाया. उन्होंने 9 महीने के लिए पद छोड़ा था. सभी ने संकल्प लिया था कि '25 से 30, फिर से नीतीश', लेकिन नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति में अपनी मौजूदगी का आश्वासन देकर एमएलसी पद छोड़ा है. मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि बिहार में न कोई नीतीश कुमार जैसा दूसरा पैदा हुआ है और न कोई दिखाई पड़ रहा है."

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