Continues below advertisement

बिहार स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक और NDA सरकार में सड़क निर्माण विभाग मंत्री नितिन नबीन को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. उनकी नियुक्ति के निहितार्थ निकाले जा रहे हैं कि वही बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. अगर यह परंपरा जारी रही तो बीजेपी में 45 वर्षों के इतिहास में पहली बार कोई राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार से होगा.

आइए आपको उन पांच खास वजहों के बारे में जानकारी देते हैं जिसकी वजह से बीजेपी ने नितिन नबीन के नाम पर अंतिम मुहर लगाई-

Continues below advertisement

नितिन नबीन को बीजेपी के वर्ष 2023 के छत्तीसगढ़ चुनाव में राज्य प्रभारी नियुक्त किया था. कई एग्जिट और ओपिनियन पोल्स में यह दावा किया जा रहा था कि राज्य में भूपेश बघेल की अगुवाई वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकार दोबारा लौटेगी. हालांकि ऐसा नहीं हुआ. जानकारों का कहना है कि नितिन नबीन ने छत्तीसगढ़ प्रभारी की नियुक्ति के दिन से ही राज्य इकाई में काम करना शुरू कर दिया. टिकट बंटवारे से लेकर अन्य संगठनात्मक हिस्सों पर जोर दिया और राज्य में पांच साल बाद फिर बीजेपी की सरकार आई.

Nitin Nabin Education: बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन हैं बारहवीं पास, दिल्ली के इस स्कूल से की पढ़ाई

नबीन, भारतीय जनता पार्टी की युवा मोर्चे के महामंत्री भी रहे हैं. ऐसे में उनके पास राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अनुभव है. वह दो बार भाजयुमो के महामंत्री रहे.

संगठन के अलावा नबीन के पास संसदीय जीवन का भी लंबा अनुभव है. वह पांच बार से बांकीपुर विधानसभा के विधायक रह चुके हैं. नवंबर 2025 में संपन्न हुए चुनाव में उन्होंने राजद की रेखा कुमारी को 51 हजार 936 मतों से हराया. नबीन, जनता दल यूनाइटेड के गठबंधन वाली एनडीए सरकार में मंत्री भी बने.

कायस्थ समुदाय से आने वाले नितिन नबीन बीजेपी नेता रहे किशोर सिन्हा के बेटे हैं. माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव में कायस्थों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भी बीजेपी ने नितिन नबीन पर भरोसा जताया. राज्य में अगले वर्ष चुनाव हैं और कायस्थ समुदाय की करीब 15 लाख से ज्यादा की आबादी पश्चिम बंगाल में निवास करती है.

इसके साथ ही बिहार से नबीन का प्रमोशन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है. बिहार बीजेपी की चुनावी रणनीति के केंद्र में है. राज्य के एक नेता को राष्ट्रीय संगठनात्मक नेतृत्व में लाकर, पार्टी पूर्वी भारत पर ज़्यादा ध्यान देने का संकेत दे रही है.