बिहार के नालंदा जिले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बीच चिकित्सकों की बायोमैट्रिक हाजिरी को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है. बिहारशरीफ स्थित मॉडल अस्पताल में जुलाई महीने में बायोमैट्रिक अटेंडेंस दर्ज नहीं कराने वाले 41 चिकित्सकों के वेतन पर जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है. कार्रवाई के बाद अस्पताल के डॉक्टरों में नाराजगी देखी जा रही है.

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बताया गया है कि मॉडल अस्पताल में कुल 42 चिकित्सक कार्यरत हैं. जिला प्रशासन की ओर से सभी डॉक्टरों को नियमित रूप से बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था. हालांकि जुलाई महीने में महज एक चिकित्सक ने ही बायोमैट्रिक हाजिरी दर्ज कराई. बाकी 41 चिकित्सकों ने निर्धारित व्यवस्था के तहत अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई. प्रशासन ने इसे निर्देशों की अनदेखी मानते हुए सभी 41 चिकित्सकों के जुलाई महीने के वेतन पर रोक लगा दी.

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प्रशासन बोला- मरीजों को बेहतर सेवा देना मकसद

जिला प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस व्यवस्था लागू की गई है. इसका उद्देश्य अस्पताल आने वाले मरीजों को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है. इसी के तहत बायोमैट्रिक व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है.

डॉक्टरों में नाराजगी, पुरानी व्यवस्था का दिया हवाला

वेतन रोके जाने के बाद चिकित्सकों में नाराजगी है. डॉक्टरों का कहना है कि पहले सभी चिकित्सकों की हाजिरी सदर अस्पताल में दर्ज की जाती थी. बायोमैट्रिक व्यवस्था को लेकर कुछ व्यावहारिक समस्याएं हैं, जिन्हें दूर किया जाना जरूरी है. चिकित्सक जल्द ही जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराने और ज्ञापन सौंपने की तैयारी में हैं. हालांकि उनकी शिकायत है कि डीएम मिलने का समय नहीं दे रही हैंं.

बात नहीं बनी तो हड़ताल की चेतावनी

मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश सिंह ने कहा कि वह जिलाधिकारी से बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करेंगे. वहीं चिकित्सकों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों और समस्याओं पर सहमति नहीं बनी तो वे हड़ताल का रास्ता अपना सकते हैं. ऐसे में अब जिला प्रशासन और चिकित्सकों के बीच होने वाली बातचीत अहम हो गई है.

 एक तरफ प्रशासन बायोमैट्रिक हाजिरी को उपस्थिति सुनिश्चित करने का जरूरी माध्यम बता रहा है, तो दूसरी ओर डॉक्टर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं. अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनी तो मॉडल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर पड़ सकता है.

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