मुजफ्फरपुर: प्रसाद अस्पताल आग हादसे में मौत का आंकड़ा बढ़कर हुआ 5, CM ने किया मुआवजे का ऐलान
Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरनगर के प्रसाद अस्पताल में लगी आग ने पांच लोगों की जान ले ली है. इस हादसे को लेकर सीएम सम्राट ने दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है.

Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में लगी आग ने पांच लोगों की जान ले ली है. इस हादसे को लेकर सीएम सम्राट चौधरी ने दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है. मृतकों के आश्रितों को बिहार सरकार 4-4 लाख रुपये सहायता राशि दे रही है.
सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से चार व्यक्तियों की मृत्यु अत्यंत दुःखद है. शोक-संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं. ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें. मृतकों के परिजनों को अविलंब 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान प्रदान करने का निर्देश दिया गया है. स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है तथा घायलों के उपचार हेतु सदर अस्पतालों में समुचित व्यवस्था की गई है."
अब भी बढ़ सकता है मौत का आंकड़ा
जानकारी के लिए बता दें कि मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल के आईसीयू वार्ड में शॉट सर्किट के कारण आग लगने से अबतक 5 लोगों की मौत की खबर है. आईसीयू में कुल 15 मरीज थे. इन मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है. ऐसे में मौतों का आंकड़ा अब भी बढ़ सकता है. बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने जानकारी दी है कि आग के कारणों की जांच के लिए मौके पर जांच एजेंसी की टीम पहुंच गई है और जांच जारी है. सभी पहलुओं पर इन्वेस्टिगेशन चल रहा है.
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने साधी चुप्पी
मुजफ्फरपुर की घटना पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कुछ नहीं बोला. पत्रकारों के सवालों के कुछ भी जवाब नहीं दिए. साथ में जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी कुछ भी नहीं जवाब दिया.
मरीज के भाई ने बताया- सिक्योरिटी वाले भाग गए थे
एक चश्मदीद ने जानकारी दी कि रात के 3.00 बजे के करीब उसने आईसीयू से धुआं देखा. वह वहीं पास में गेट पर सोया हुआ था. कोई देखने वाला नहीं था और सारे सिक्योरिटी वाले भाग गए थे. कोई सिक्योरिटी वाला हेल्प नहीं कर रहा था. पूरा अंधेरा था और जैसे ही मैंने आईसीयू का दरवाजा खोला पूरा झरक मार रहा था. नाक-मुंह बांध के गए फिर भी सांस नहीं लिया जा रहा था. उसी में मेरा एक भाई था. अभी उसको निकालकर दूसरे हॉस्पिटल में शिफ्ट किया है.
























