मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड की सिंगियान पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, रानीपट्टी में शिक्षा का मंदिर अब तबेले में बदल चुका है. सरकारी स्कूल की जमीन पर खुलेआम कब्जा कर 17 नाद रख दिए गए हैं और पूरे परिसर में मवेशी बांधे जा रहे हैं.  417 छात्र-छात्राओं का भविष्य गोबर, कीचड़ और बदबू के बीच दम तोड़ रहा है. जिस मैदान में बच्चों को खेलना चाहिए, वहां मवेशी चारा खा रहे हैं. जहां बच्चों की किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहां पिछले कई सालों से गाय-भैंसों की घंटियां बज रही हैं.

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13 साल से स्कूल परिसर में अतिक्रमण

बरसात में पूरा परिसर दलदल बन जाता है और बच्चों का स्कूल पहुंचना तक मुश्किल हो जाता है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह हाल एक-दो महीने नहीं, बल्कि पूरे 13 साल से जारी है. शिकायतें होती रहीं, फाइलें घूमती रहीं, नोटिस जारी होते रहे, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कागजों से बाहर नहीं निकल सकी.

प्रिंसिपल हारून रशीद का क्या है आरोप?

प्रभारी प्रिंसिपल हारून रशीद का कहना है कि जब भी अतिक्रमणकारियों को मवेशी हटाने के लिए कहा जाता है, वे झुंड बनाकर स्कूल पहुंच जाते हैं. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ''शिक्षकों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है, झूठे मुकदमों और एससी-एसटी एक्ट में फंसाने तक की धमकी दी जाती है. कई बार स्थानीय लोग स्कूल के बरामदे को भी अपना अड्डा बना लेते हैं, जिससे पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित होती है.''

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बीईओ, डीईओ और CO से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं!

बताया जा रहा है कि स्कूल प्रशासन ने बीईओ, डीईओ और अंचलाधिकारी को कई बार लिखित शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई आज तक अधूरी है. हालांकि, जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा, ''अतिक्रमण की जानकारी है. पहले भी नोटिस दिया गया था, अब अंचलाधिकारी को दोबारा रिमाइंडर भेजा जा रहा है और जल्द स्कूल परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा.

अब आखिर सवाल ये है कि पिछले 13 साल से बच्चों का भविष्य तबेले के हवाले किसकी लापरवाही से है? शिक्षा का मंदिर बचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे?

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