विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए नियम 2026 को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी है. इस पर मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) की ओर से बड़ा बयान दिया गया है. उनके बेटे और बिहार सरकार में मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि सरकार कोई भी बिल लाती है तो वह जनहित का होता है. पहले इसे पहले पढ़ना और समझना चाहिए, उसके बाद ही टिप्पणी करनी चाहिए. संतोष सुमन ने गयाजी में पत्रकारों से यह बातें कहीं.

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संतोष सुमन ने कहा, "समाज के उस तबके के लोग जो गरीब, पिछड़ा हैं, शिक्षण संस्थानों में दिव्यांगता, धर्म या जाति, किसी पर कोई टिप्पणी की जाती है उस पर रोक लगाने के लिए यह बिल है. किसी पर ज्यादती करने वाला बिल नहीं है. ऐसा प्रावधान है कि कमेटी में 10 सदस्य होंगे, जिसमें सभी जाति के लोग रहेंगे. शिक्षण संस्थानों के जो हेड हैं जो समाजसेवी हैं वह किसी भी समाज से हो सकते हैं. कमेटी के बाद भी अपील का प्रावधान है. अगर ऐसा कुछ होता है कि 30 दिनों के अंदर अपील भी कर सकते हैं."

'फंडामेंटल राइट का हनन हो रहा है तो...'

संतोष सुमन ने कहा कि सरकार ने निष्पक्ष रूप से कोशिश की है कि सुधार हो, कैंपस में एक माहौल बन सके, ताकि सभी लोग अच्छे से पढ़ सकें. किन्हीं को लगता है कि फंडामेंटल राइट का हनन हो रहा है तो न्यायालय का भी मामला है. सरकार के समक्ष अपील होनी चाहिए. इसे हिंसा के रूप में नहीं लेना चाहिए. यह कोई चाबुक चलाने वाला बिल नहीं है. यह समाज के सभी तबके को न्याय दिलाने की बात है ताकि वह भी अच्छे माहौल में पढ़ सकें. 

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पप्पू यादव कोर्ट नहीं- संतोष कुमार सुमन

दूसरी ओर नीट छात्रा की मौत मामले पर पप्पू यादव ने बयान दिया है कि बड़ी मछलियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है. इस पर कहा कि पप्पू यादव कोर्ट नहीं हैं. पप्पू यादव के कहने से सरकार अपना कोई फैसला नहीं बदलेगी या जांच प्रभावित नहीं होगा. जांच अपने तरीके से होगी. बड़ी मछली हो या छोटी मछली, कानून से बड़ा कोई नहीं होता है. 

मंत्री ने कहा कि अगर कोई भी व्यक्ति इसमें संलिप्त पाए जाएंगे तो सलाखों के पीछे होंगे. पप्पू यादव के बयान से न तो सरकार को मतलब है और न ही जांच करने वाले को. उनके इस तरह के बयान से उन्हें फॉलो करने वालों के बीच गलत मैसेज जाता है, जो यह जांच प्रभावित भी करता है. उन्हें ऐसी बातों से बचना चाहिए.