बिहार एनडीए में शराबंबदी खत्म करने पर बहस जारी है. जेडीयू से विधायक अनंत सिंह (JDU MLA Anant Singh) इस कानून को खत्म करने की मांग कर चुके हैं तो वहीं उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) की पार्टी के एमएलए माधव आनंद (Madhav Anand) भी लगातार इस पर बयान दे रहे हैं. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) भी पहले से ही समीक्षा करने की मांग करते आए हैं. अब जब बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि शराबबंदी लागू रहेगी और पुनर्विचार का सवाल ही नहीं उठता है तो इस पर मांझी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.
शनिवार (18 अप्रैल, 2026) की शाम पटना में मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, "सम्राट जी को बने (मुख्यमंत्री) दो-चार-पांच दिन हुआ ही है… ये लोग आपस में विचार करेंगे, समीक्षा करेंगे… लाभ हानि के बारे में सोचकर निर्णय लेंगे."
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'हमारा जो स्टैंड शुरू से है वही आज भी है…'
जीतन राम मांझी ने कहा कि जहां तक हमारी बात है, हमारा जो स्टैंड शुरू से है वही आज भी है. शराबबंदी कोई खराब नहीं है, नीति ठीक है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में गड़बड़ी है. इसके चलते गरीब लोगों को कानून कार्रवाई में दिक्कत हो रही है.
क्यों करनी चाहिए शराबबंदी कानून की समीक्षा?
जीतन राम मांझी ने बताया कि क्यों शराबबंदी कानून की समीक्षा करनी चाहिए. उन्होंने कहा, "शराबबंदी के चलते जो जल्दीबाजी में शराब बनाते हैं उसमें वे लोग यूरिया और क्या-क्या मिलाकर दो घंटे में बना देते हैं… यही कारण है कि गरीब तबके के जो लोग शराब पीते हैं वो 50-60 साल में मर जाते हैं. यानी गरीब को दोनों तरफ से घाटा है, इसलिए समीक्षा करनी चाहिए. शराब नीति पर समीक्षा करनी चाहिए और इसके क्रियान्वयन को ठीक करना चाहिए इससे राज्य को वित्तीय कोष में भी फायदा होगा.
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