बिहार के जहानाबाद सदर अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी और तनाव का माहौल पैदा हो गया, जब एक हत्या के बाद पोस्टमार्टम को लेकर परिजनों ने डॉक्टरों पर हमला कर दिया. मामला सिर्फ मारपीट तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन आमने-सामने आ गए. सिविल सर्जन ने जहानाबाद के एसपी अपराजित लोहान पर बदसलूकी का गंभीर आरोप लगाया, जिसके विरोध में डॉक्टरों ने अस्पताल की ओपीडी (OPD) सेवा अनिश्चितकाल के लिए ठप कर दी.

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हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों के दखल के बाद हड़ताल तो खत्म हो गई, लेकिन एसपी के सख्त तेवर ने मामले को और भी गरमा दिया है. आइए तफ्सील से जानते हैं कि आखिर अस्पताल में यह पूरा हाई-वोल्टेज ड्रामा कैसे शुरू हुआ.

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आखिर कैसे भड़की चिंगारी? 

सोमवार (18 मई) की रात जहानाबाद के भेलावर थाना क्षेत्र के चातर गांव में दीपक कुमार नामक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. गोली दीपक के सिर के अंदर ही फंसी रह गई थी. जब शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए. डॉक्टरों का तर्क था कि अस्पताल में 'ब्रेन कटिंग मशीन' और सिर से गोली निकालने की कोई व्यवस्था नहीं है.

इमरजेंसी में मारपीट और खौफजदा डॉक्टरों का पलायन

डॉक्टरों के इस जवाब से मृतक के परिजन आक्रोशित हो गए. गम और गुस्से में परिजनों ने इमरजेंसी वार्ड में हंगामा शुरू कर दिया और वहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट की. भीड़ के खौफ से डॉक्टर अपनी जान बचाकर वहां से भाग खड़े हुए. हालात बेकाबू होते देख सिविल सर्जन डॉ. हरिश्चंद्र चौधरी को खुद मोर्चे पर आना पड़ा और इमरजेंसी की कमान संभालनी पड़ी.

 एसपी पर बदसलूकी का आरोप और OPD में ताला

मामला तब और उलझ गया जब सिविल सर्जन ने जिले के तेजतर्रार एसपी अपराजित लोहान पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा दिया. सुरक्षा की कमी, परिजनों की मारपीट और पुलिस के कथित रवैये से भड़के सदर अस्पताल के सभी डॉक्टरों ने कामकाज ठप कर दिया. डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाएं बंद कर दीं और चेतावनी दी कि अगर उन्हें सुरक्षा और सम्मान नहीं मिला, तो पूरे जिले के डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. इस बंदी की वजह से अस्पताल आए आम मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा.

अधिकारियों की एंट्री और लौटी सेवाएं

अस्पताल में मचे इस बवाल और मरीजों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए एसडीओ राजीव रंजन और एसडीपीओ मनीष चंद्र चौधरी ने मोर्चा संभाला. दोनों अधिकारियों ने हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों के साथ मैराथन बैठक की. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद डॉक्टरों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने दोबारा ओपीडी सेवाएं शुरू कीं.

एसपी अपराजित लोहान का तीखा पलटवार

डॉक्टरों के आरोपों पर जहानाबाद के एसपी अपराजित लोहान ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. उन्होंने अपने ऊपर लगे बदसलूकी के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है. एसपी ने अपने बयान में तीन बड़ी बातें स्पष्ट कीं:

सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम

एसपी ने कहा कि पुलिस डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है. सदर अस्पताल परिसर में पुलिस पिकेट (चौकी) बनाने के लिए जगह चिन्हित की जा रही है.

डॉक्टरों की भारी लापरवाही

एसपी ने स्वास्थ्य महकमे पर ही सवाल खड़े करते हुए कहा कि डॉक्टरों ने समय पर अपनी ड्यूटी नहीं की, जिसकी वजह से एक संवेदनशील हत्याकांड के पोस्टमार्टम में 8 घंटे का लंबा विलंब हुआ.

कार्रवाई की खुली चेतावनी

एसपी ने साफ कहा कि इतनी लंबी देरी के कारण अहम आपराधिक साक्ष्य (Evidence) नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है. अगर जांच रिपोर्ट में यह साबित होता है कि डॉक्टरों की लापरवाही से कोई भी साक्ष्य मिटा है, तो जिम्मेदार डॉक्टरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल सदर अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं सुचारू हो गई हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बीच की यह तनातनी जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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