जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग कर दी. इस बयान के बाद जदयू नेतृत्व ने साफ तौर पर त्यागी से पल्ला झाड़ लिया और इसे उनका निजी बयान बता दिया.

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जदयू की ओर से राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि केसी त्यागी के हालिया बयान पार्टी की विचारधारा और आधिकारिक स्टैंड से मेल नहीं खाते.

उन्होंने यहां तक कहा कि “केसी त्यागी जदयू के साथ हैं या नहीं, यह हमारे कार्यकर्ताओं को भी साफ नहीं है.” भारत रत्न को लेकर लिखा गया पत्र पूरी तरह से त्यागी का निजी मामला है.

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जदयू में अंदरूनी नाराजगी, कार्रवाई के संकेत

सूत्रों के मुताबिक, बीते कुछ समय से केसी त्यागी के बयानों को लेकर पार्टी में असंतोष है. कहा जा रहा है कि नेतृत्व उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रहा है. पार्टी का मानना है कि त्यागी लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जो जदयू और एनडीए की लाइन से अलग हैं.

राजद का पलटवार- भारत रत्न लालू यादव को मिले

इस पूरे विवाद पर राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि जदयू दो फाड़ में बंट चुकी है और पार्टी के भीतर ही कुछ लोग नहीं चाहते कि नीतीश कुमार को भारत रत्न मिले. तिवारी ने दावा किया कि भारत रत्न अगर किसी को मिलना चाहिए तो वह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव हैं.

पहले भी NDA से हटकर बोलते रहे हैं त्यागी

केसी त्यागी इससे पहले भी कई मुद्दों पर एनडीए से अलग राय रखते नजर आए हैं. आईपीएल से बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को बाहर किए जाने पर उन्होंने कहा था कि खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए. इसके अलावा समान नागरिक संहिता, सरकारी नौकरियों में लैटरल एंट्री और इजराइल-फलस्तीन संघर्ष जैसे मुद्दों पर भी उनके बयान पार्टी लाइन से अलग रहे हैं.

अब सवाल यह है कि जदयू नेतृत्व केसी त्यागी पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या नहीं. फिलहाल पार्टी ने उनके बयान से दूरी बनाकर साफ संदेश दे दिया है कि संगठन की लाइन से हटकर बोलने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.