ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब खाड़ी देशों के साथ भारत में भी देखने को मिल रहा है. जी हां बिहार के गोपालगंज, सीवान जिले से बड़ी संख्या में मजदूर खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं. लेकिन वहां विपरीत परिस्थितियों के कारण वापस लौट आए हैं. अब उनके सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट बन गया है.
इनमें से ज्यादातर श्रमिक अब वापस नहीं लौटना चाहते,यहीं कम करना चाहते. मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट देख जिला प्रशासन द्वारा खाड़ी देशों से लौटे श्रमिकों का सर्वे कराया जा रहा है. ताकि इनके मुताबिक इन्हें यहां काम मिल सके.
एक हजार से अधिक मजदूर लौटे
एबीपी न्यूज़ ने हकीकत जानने के लिए ग्राउंड रिपोर्ट की, जिसमें पता चला कि गोपालगंज के खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों की संख्या करीब 1 लाख है. इसमें से एक हजार से अधिक लौट आएं हैं वापस यहां. जब वापस लौटे मजदूरों और उनके परिजनों से बात की तो उन्होंने बताया कि तो सभी ने सुरक्षा को लेकर ही प्रमुख वजह बताई.
अबु धाबी में ऑपरेटर का काम करने वाले सुजीत कुमार यादव बताते हैं कि वहां लगातार हमले और युद्ध की स्थिति से खतरा बना रहता था. यहां परिवार चिंतित रहता था, लिहाजा वापस लौट आए. इसी तरह क़तर, दुबई और कई जगहों से प्लम्बर, एलुमिनियम का काम करने वाले कारीगर और मजदूर लौट आए हैं.
प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती
इतनी बड़ी संख्या में श्रमिकों के वापस आने से स्थानीय प्रशासन के सामने सबके लिए रोजगार देने का संकट पैदा हो गया है. अधिकारियों ने बताया कि पहले इन श्रमिकों का सर्वे कराया जा रहा है, ताकि इनके अनुभव और दक्षता के मुताबिक काम मिल सके. जल्द ही सबको कुछ न कुछ काम का बंदोबस्त किया जाएगा.
यहां बता दें कि खाड़ी देश में जिस तरह के हालात हैं वहां से लगातार पलायन जारी है.जिसके चलते न सिर्फ बिहार में बल्कि कई और जगह भी वहां से लौटे लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट है.
