राज्य में सरकारी भूमि के संरक्षण और सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक सख्ती और तेज हो गई है. सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किया गया है कि कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज सरकारी भूमि, जिस पर विधिसम्मत बंदोबस्ती नहीं हुई है और जो निजी व्यक्तियों के कब्जे में है, उसे प्राथमिकता के आधार पर विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए मुक्त कराया जाए. यह निर्देश राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने जारी किया है.

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इस संबंध में उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकारी भूमि राज्य की अमूल्य संपत्ति है. इस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न तो स्वीकार्य है और न ही सहनीय. 

विजय सिन्हा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के आलोक में हमने सभी जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज ऐसी सरकारी भूमि, जिनका विधिसम्मत बंदोबस्ती नहीं हुआ है, उन्हें विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए प्राथमिकता के आधार पर मुक्त कराया जाए. अधिकारियों की किसी भी चूक या लापरवाही के कारण राज्य के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे.

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'राज्य के विकास की आधारशिला मजबूत करने का प्रयास'

उन्होंने कहा कि प्रशासन शून्य सहिष्णुता की नीति के साथ कार्रवाई करेगा. हमारी प्राथमिकता है कि अंचलवार सरकारी भूमि को सुरक्षित कर लैंड बैंक का निर्माण किया जाए, ताकि राज्य में औद्योगीकरण, आधारभूत संरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके. यह अभियान केवल भूमि मुक्त कराने का नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला मजबूत करने का प्रयास है.

प्रधान सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों में कहा गया है कि ऐसी सभी सरकारी भूमि की पहचान कर विधिसम्मत कार्रवाई के तहत वाद दायर किए जाएं तथा भूमि की रिकवरी सुनिश्चित की जाए. सभी जिला प्रशासन को यह भी निर्देशित किया गया है कि इस कार्य को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए नियमित निगरानी की जाए. इन निर्देशों की मूल अवधारणा अंचलवार सरकारी भूमि को सुरक्षित कर लैंड बैंक का निर्माण करना है, ताकि राज्य में औद्योगीकरण, आधारभूत संरचना विकास और जनकल्याणकारी परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके.

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