बढ़ती महंगाई, महंगे पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और खाद के बीच आम जनता परेशान है. वहीं सब्जी उत्पादक किसानों की स्थिति और भी बदतर हो गई है. खेत से लेकर मंडी तक बिचौलिए मालामाल हो रहे हैं, जबकि किसान सब्जी कौड़ियों के भाव बेचने को मजबूर हैं. एबीपी न्यूज की टीम राजधानी पटना से सटे सब्जी उत्पादन के प्रमुख केंद्र खुशरूपुर पहुंची. सुबह 4 बजे से ही खेतों में किसान पूरे परिवार के साथ सब्जी तोड़ते नजर आए.
किसानों ने क्या कुछ बताया?
किसानों ने बताया कि सुबह 7 बजे तक मंडी पहुंचना जरूरी है, देर हुई तो भाव और गिर जाता है या सब्जी बिकती ही नहीं. वर्तमान में पटना के बाजारों में नेनुआ (तोरई) 20 से 30 रुपये किलो बिक रहा है, लेकिन किसानों को मात्र 3 से 4 रुपये किलो ही मिल पा रहा है. 50 किलो नेनुआ ले जाने में 50-60 रुपये का किराया लगता है, जिसके बाद हाथ में मुश्किल से 120 रुपये बच पाते हैं.
अच्छी पैदावार लेकिन भाव बेहद कम
भिंडी, करेला, खीरा, लौकी, टमाटर और परवल की भी यही स्थिति है. किसानों के मुताबिक, कई बार भिंडी तो 2 रुपये किलो पर भी बिक जाती है. किसानों ने बताया कि पुरवा हवा के कारण सब्जी तो अच्छी पैदावार हो रही है, लेकिन भाव बेहद कम हैं. अगर समय पर मंडी न पहुंचे तो पूरी सब्जी मवेशियों को खिलाना पड़ता है. खुशरूपुर मंडी में व्यापारी टुन्नी सिंह ने बताया कि पिछले 20 दिनों से यही हाल है. उत्तम क्वालिटी का परवल शहर में 40 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि किसान को 10-12 रुपये किलो मिल रहा है. खाद, डीजल और परिवहन महंगा होने के बावजूद किसानों को 3-5 रुपये किलो ही मिल पा रहा है.
मंत्री रामकृपाल यादव ने क्या कहा?
बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने स्वीकार किया कि प्राइवेट मंडियों में बिचौलिए किसानों का शोषण कर रहे हैं. उन्होंने कहा- हम इस मुद्दे पर गंभीर हैं और किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए योजना बना रहे हैं. किसानों का कहना है कि बाजार में जो दाम है, उसका लगभग 10 गुना बिचौलिए कमा रहे हैं, जबकि खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा है. फिलहाल सब्जी किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है.
पटना में बड़ा हादसा, गंगा नदी में डूबने से 3 की मौत, आगे हादसा न हो इसके लिए उठाया गया बड़ा कदम
