पटना में दशहरे की धूम के बीच रामलीला की कथा सनातन आस्था को नया रंग दे रही है. पटना में राम कथा और रामायण की महफिल सज चुकी है. पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक बार फिर रामलीला हो रहा है, जो चर्चा का केंद्र है.
आयोजन को लेकर लोगों में दिखा काफी उत्साह
खास बात यह है कि 2008 के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर गांधी मैदान मव रामलीला का आयोजन किया गया है. पूरे 17 साल बाद गांधी मैदान में यह आयोजन होने जा रहा है. राजधानी पटना और असके आस पास के लोगों में इस आयोजन को लेकर काफी उत्साह दिख रहा है.
इस रामलीला की खास बात यह है कि इसका आयोजन दशहरा कमेटी ट्रस्ट की और से आयोजीत किया गया है. कार्यक्रम 22 सितंबर से शुरू है और इसका समापन 3 अक्टूबर को होगा. आयोजकों ने बताया कि हर शाम 4 से 6 बजे तक स्थानीय कलाकारों के जरिए भजन-गायन होगा, जबकि शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक रामलीला का मंचन किया जाएगा.
इसमें भगवान श्रीराम के जन्म, ताड़का वध, राम-सीता विवाह, राम जी का वनवास, सीता हरण, सुग्रीव मित्रता, संजीवनी कथा से लेकर रावण दहन और श्रीराम के राज्याभिषेक तक के प्रसंगों को दिखाया जाएगा. दशहरा कमेटी पदाधिकारियों ने बताया कि गांधी मैदान में रामलीला का आयोजन पटना के सांस्कृतिक जीवन की बड़ी परंपरा रही है.
17 साल बाद गांधी मैदान में फिर से रामलीला की वापसी
बता दें कि पिछले कई सालों से यह मंचन अन्य स्थानों पर हो रहा था, लेकिन अब 17 साल बाद गांधी मैदान में फिर से इसकी वापसी हुई है. इससे श्रद्धालुओं और दर्शकों में खासा उत्साह है. गौरतलब है कि दशहरा पर्व में रामलीला का मंचन धार्मिक महत्व को बढ़ाता है. यह बिहार की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता को भी दर्शाता है. गांधी मैदान में रामलीला का वाचन प्रदेशवाशियों को परंपरा और आस्था से एक बार फिर जोड़ने का नया प्रयास है.
ये भी पढ़ें: Dussehra 2025: हिंदू परंपरा और मुस्लिम कारीगर, यही है भारत की खूबसूरती, मिसाल है गया का रावण दहन
