बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है और रिसॉर्ट पॉलिटिक्स जारी है. राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ओर से अपने विधायकों को शिफ्ट करने पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा न हो, लेकिन हमारे विधायक पटना में सक्रिय रूप से घूम रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि हम अपने पार्टी सिद्धांतों पर दृढ़ता से खड़े हैं. यही सिद्धांत किसी व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाते हैं.

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से कांशी राम पर की गई टिप्पणी पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा, "अगर कांग्रेस ने कांशी राम, जगजीवन राम और डॉ. बी.आर. अंबेडकर जैसे महान नेताओं का सचमुच सम्मान किया होता, तो आजादी के इतने वर्षों बाद भी डॉ. बी.आर. अंबेडकर को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार और उसके समझौतों के कारण भारत रत्न से सम्मानित नहीं किया जाता है. 

'डॉ. भीम राव का स्मारक कांग्रेस ने 70 साल तक नहीं बनाया'

उन्होंने कहा, ''डॉ. बी.आर. अंबेडकर के निधन पर कांग्रेस ने उनके शव को दफन करने और स्मारक बनाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई थी. उनकी पत्नी को शव को फ्लाइट से मुंबई ले जाना पड़ा था और दफनाना पड़ा था. कांग्रेसी अपने खानदान के लिए 200 एकड़ में स्मारक बनाकर रखे हुए हैं. डॉ. भीम राव का स्मारक कांग्रेस ने 70 साल तक नहीं बनाया. जब केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार आई, तो दिल्ली में भीम राव अंबेडकर का स्मारक बनाया गया. कांग्रेसियों को पूरे देश को पहचानती है कि इनका दलित प्रेम क्या है."

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राहुल गांधी ने क्या कहा था?

दरअसल, लखनऊ में आयोजित संविधान सम्मेलन में राहुल गांधी ने कहा था कि अगर कांशीराम पं. नेहरू के दौर में होते, तो वे कांग्रेस पार्टी से मुख्यमंत्री होते. राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस अतीत में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाने में विफल रही थी, जिसके कारण कांशी राम जैसे नेताओं को अलग राजनीतिक रास्ता चुनना पड़ा. उन्होंने कहा कि अगर उस समय कांग्रेस ने प्रभावी ढंग से काम किया होता, तो कांशी राम को अलग से संघर्ष करने की जरूरत नहीं पड़ती. नेहरू यह सुनिश्चित करते कि कांशी राम मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचते.