बीजेपी और जेडीयू ने बिहार विधान परिषद के आगामी द्विवार्षिक चुनाव के लिए शुक्रवार को अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. अब तक राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश के नाम की घोषणा नहीं हुई है. ऐसे में उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं.
निशांत कुमार और दीपक प्रकाश किसी सदन के सदस्य नहीं
दरअसल, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश दोनों वर्तमान में किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, मंत्रिमंडल में शामिल होने के छह महीने के भीतर उन्हें विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य निर्वाचित होना आवश्यक है. विधान परिषद की द्विवार्षिक चुनाव व उपचुनाव दोनों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित की गई है.
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जेडीयू की सूची में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और हाल में मंत्री बनाए गए निशांत कुमार का नाम भी शामिल है. बिहार की 75 सदस्यीय विधान परिषद की नौ सीट पर द्विवार्षिक चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव की घोषणा हाल में की गई थी.
उपचुनाव के लिए जेडीयू ने ललन प्रसाद को दिया टिकट
यह उपचुनाव जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद रिक्त हुई सीट के लिए कराया जा रहा है. विधान परिषद सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है. पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष उमेश कुशवाहा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, उपचुनाव के लिए ललन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया गया है.अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) की धनुक जाति से आने वाले ललन प्रसाद को जेडीयू नेतृत्व का करीबी माना जाता है.
जेडीयू ने दो महिला नेताओं को भी दिया मौका
आगामी चुनाव के लिए जेडीयू ने दो महिला उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारा है, जिनमें पार्टी की प्रवक्ता एवं महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष भारती मेहता तथा पश्चिम चंपारण की पार्टी कार्यकर्ता शिवरानी देवी प्रजापति शामिल हैं. मधुबनी की रहने वाली भारती मेहता पूर्व में बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड की अध्यक्ष रह चुकी हैं.वह अत्यंत पिछड़ा वर्ग की नोनिया समुदाय से आती हैं. वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की कुम्हार जाति से संबंध रखने वाली शिवरानी देवी प्रजापति जेडीयू की पूर्व प्रदेश महासचिव रह चुकी हैं.
जेडीयू के सभी उम्मीदवारों का पिछड़े समुदाय से ताल्लुक
जिन नौ सीट पर द्विवार्षिक चुनाव होने हैं, उनमें से चार सीट जेडीयू के पास थीं. पार्टी ने इस बार कम सीट पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है जबकि छह वर्ष पहले की तुलना में विधानसभा में जेडीयू की संख्या अधिक थी. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों को समायोजित करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है. बीजेपी 89 विधायकों के साथ विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है. पिछले कार्यकाल में नौ में से केवल दो सीट बीजेपी के पास थीं लेकिन इस बार सत्तारूढ़ दल ने चार उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. जेडीयू के सभी उम्मीदवार पिछड़े वर्गों से हैं.
बीजेपी ने सर्वण, ओबोसी और ईबीसी को साधा
वहीं बीजेपी ने सामाजिक संतुलन साधने के लिए सवर्ण, ओबीसी और ईबीसी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया है. पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी संजय मयूख शामिल हैं, जो लगातार तीसरी बार विधान परिषद चुनाव में जीत हासिल करने के लिए चुनाव मैदान में हैं.
इनके अलावा भोजपुरी अभिनेता एवं गायक पवन सिंह को भी उम्मीदवार बनाया गया है. पवन सिंह ने 2024 का लोकसभा चुनाव काराकाट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था. बीजेपी के अन्य उम्मीदवार अनिल ठाकुर और शीला पंडित दोनों अत्यंत पिछड़ा वर्ग से आते हैं तथा जमीनी स्तर के कार्यकर्ता रहे हैं. जिन नौ सीट पर चुनाव होना है, उनमें से तीन सीट आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन के पास हैं.
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