पटना के चिड़ियाघर यानी संजय गांधी जैविक उद्यान (Sanjay Gandhi Biological Park) का नाम बदल गया है. बीते बुधवार (29 अप्रैल, 2026) को सम्राट कैबिनेट की बैठक हुई थी. इसमें 63 एजेंडों पर मुहर लगी थी. इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि 45 वर्षों के बाद पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम बदलकर 'पटना जू' कर दिया गया. इस पर अब बिहार में राजनीती तेज हो गई है. इस मामले पर कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला किया है. 

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गुरुवार (30 अप्रैल, 2026) को कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने सम्राट सरकार को घेरा. कहा कि भारतीय जनता पार्टी में बड़ी खामियां हैं. हमारे देश के धरोहरों को प्रभावित करने की चेष्टा करते रहती है. 

उन्होंने आगे कहा, "नाम बदलने से कौन सी बड़ी लकीर खींच दी गई? एक और दूसरा जू बना देते और उसका नाम किसी और के नाम पर रख देते. नाम सिर्फ इस खुन्नस में बदला गया कि आपके (बीजेपी) लोग खुश रहेंगे और कांग्रेस पार्टी कमजोर होगी. नाम बदल देना बीजेपी की ओछी मानसिकता का परिचायक है.

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क्या है पटना के चिड़ियाघर का इतिहास? 

बता दें कि पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान को 1969 में एक वनस्पति उद्यान के रूप में स्थापित किया गया था. बिहार के तत्कालीन राज्यपाल नित्यानंद कानूनगो ने राज्यपाल भवन परिसर से लगभग 34 एकड़ भूमि इस उद्यान के लिए उपलब्ध कराई थी. बाद में 1973 में चिड़ियाघर के रूप में जनता के लिए खोला गया था.

1980 में बिहार में कांग्रेस की सरकार बनी और मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र बने थे. उसी वर्ष 23 जून 1980 को विमान उड़ाते समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी की मृत्यु हो गई थी. इसके बाद 1981 में मुख्यमंत्री जगनाथ मिश्र ने इस उद्यान का नाम संजय गांधी जैविक उद्यान रखा था. बाद में यह नाम कैबिनेट से पास हुआ था. उस वक्त केंद्र में भी कांग्रेस के इंदिरा गांधी की सरकार थी.

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