बिहार में शराबबंदी कानून को सफल बनाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के उद्देश्य से पटना के लोक भवन स्थित मंडपम में 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शराबबंदी कानून के प्रभाव और समाज में आए बदलाव को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास सिर्फ कानून लागू करना नहीं, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखकर एक बेहतर समाज का निर्माण करना है.
'बिहार की स्थिति पहले से बदली'
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा, "मैं जानता हूं कि बिहार के लोग आजकल ज्यादा पूजा करते हैं. देवघर जाते हैं, बनारस जाते हैं, कुशीनगर जाते हैं. ये सब हमें पता है. लेकिन बिहार की स्थिति बदली है. मैं ये कहना चाहता हूं. हम लोग विधायक के तौर पर जनता के बीच में जाते थे, तो अनुभव करते थे कि जब लोगों से गांव में मिलते थे और जब गांव से निकलने लगते थे, तो दो आदमी, जो शराब पीकर आते थे, वो पूछते थे, 'विधायक जी, आप कब आए? आप तो कभी दिखते ही नहीं. मैं डेढ़ घंटे से उसी गांव में हूं, लेकिन क्योंकि वो शराब पिया होता था, उसको यह अनुभव ही नहीं होता था कि मैं क्या करूं."
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सार्वजनिक स्थान पर शराबबंदी दिखता है असर- सीएम
उन्होंने आगे कहा, " आज मैं जरूर यह कह सकता हूं. बिहार के किसी भी कोने में चले जाइए, चोरी-छिपे जरूर कोई पीते होंगे, इसमें कोई शक नहीं. लेकिन किसी भी स्तर पर जो सार्वजनिक स्थान हैं, वहां आपको पूर्ण रूप से शराबबंदी का असर देखने को मिलेगा कि किस तरह जनता को इसका लाभ मिल रहा है."
नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शराब की बिक्री रोकना नहीं, बल्कि समाज को नशामुक्त बनाना और युवाओं को सही दिशा देना है. कार्यक्रम के माध्यम से अपील की गई कि वे नशे से दूर रहें और विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं.
कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों को भी नशा मुक्त समाज बनाने का संदेश दिया गया. सरकार का कहना है कि जागरूकता अभियान और जनभागीदारी के जरिए शराबबंदी कानून को और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है.
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