आरक्षण के मुद्दे पर बिहार एनडीए के दो बड़े दलित नेताओं चिराग पासवान और जीतन राम मांझी में जुबानी जंग के बीच सियासत जारी है. विपक्ष का कहना है कि दोनों नेता अपनी सुरक्षित सीट के चलते सांसद बने हैं. मंगलवार (01 सितंबर, 2026) को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को अपनी सुरक्षित संसदीय सीट छोड़कर सामान्य श्रेणी के निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की चुनौती दी. इस बीच चिराग पासवान की ओर से अब करारा जवाब आया है.

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'सीट आरक्षित, सोच नहीं'

दरअसल, चिराग पासवान के बयान को उनकी पार्टी (एलजेपी रामविलास) के एक्स हैंडल से मंगलवार को पोस्ट किया गया. इसमें बताया गया कि चिराग पासवान की सीट आरक्षित है, लेकिन उनकी सोच नहीं. पोस्ट में लिखा गया है, "किसी के अधिकार की कीमत पर किसी का हित नहीं, यही सच्चा सामाजिक न्याय है."

चार प्वाइंट का जिक्र एक्स पोस्ट में किया गया है. लिखा गया है, "मेरी सीट आरक्षित है, सोच नहीं." इसके साथ ही लिखा गया है, "मैं अनुसूचित जाति-जनजाति के न्याय की बात कर रहा हूं, मैं पिछड़े वर्ग के न्याय की बात कर रहा हूं, मैं सामान्य वर्ग के न्याय की बात कर रहा हूं, मैं जमात की बात कर रहा हूं."

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जानकारी हो कि जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन ने एससी/एसटी आरक्षण में उप-कोटा और क्रीमी लेयर जैसी समीक्षा की मांग की है. वहीं चिराग पासवान ने कहा है कि एनडीए सरकार सवर्ण जातियों की आशंकाओं’ को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है. वह सुनिश्चित करेगी कि वंचित वर्गों के हितों की रक्षा से अन्य सामाजिक समूहों का शोषण न हो. उन्होंने यह भी कहा है कि अगर ऊंची जातियों को लगता है कि उन्हें न्याय की जरूरत है, तो उनकी मदद करना वह अपनी जिम्मेदारी समझेंगे.

बता दें कि चिराग पासवान केंद्र में मंत्री हैं और हाजीपुर से सांसद हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में वे हाजीपुर से लड़े थे. इससे पहले वे जमुई से सांसद रह चुके हैं. 2024 में जमुई से उन्होंने अपने जीजा अरुण भारती को उम्मीदवार बनाया था. वे भी जीत गए थे. 

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