बिहार में क्राइम पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सम्राट सरकार में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. बीजेपी नेता और औरंगाबाद के पूर्व सांसद रहे सुशील सिंह ने मगध विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. 

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पूर्व सांसद ने मांग की है कि कार्यवाहक कुलपति को तत्काल पद से हटाया जाए. निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाए. यह पत्र सुशील सिंह ने 16 मई को लिखा है. इसमें उन्होंने बताया है कि प्रो. शशि प्रताप शाही ने तीन वर्ष से अधिक के कार्यकाल में करीब 150 से 200 करोड़ की निकासी विश्ववि‌द्यालय कोष से की है. 

धनबल के आधार पर मैनेज करने का आरोप

यह भी कहा गया है कि भ्रष्टाचार, अवैध निकासी और अवैध नियुक्ति के संबंध में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पीड़ितों ने दर्जनों बार राज्यपाल सचिवालय को साक्ष्य के साथ पत्र भेजा. जनहित याचिका भी पटना हाई कोर्ट में (CWJC No-5762/2026) दायर की गई, लेकिन राज्यपाल सचिवालय की ओर से बार-बार कुलपति को ही परिवाद पत्रों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया जाता है. मतलब जिस पर आरोप लगाए जा रहे उसे ही जांचकर्ता बनाया जाता है. इससे आवेदकों को प्राकृतिक न्याय नहीं मिल पा रहा है. सभी परिवादी याचिकाकर्ताओं को दबंग कुलपति द्वारा धनबल के आधार पर मैनेज किया जा रहा है.

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पूर्व सांसद का कहना है कि राज्यपाल सचिवालय के भी कुछ अधिकारी हैं जो कुलपति को मदद पहुंचाते हैं. उन्होंने कहा है कि वे कुलपति के खिलाफ निगरानी विभाग को भी साक्ष्य के साथ 15 मई (2026) को पत्र लिख चुके हैं.

बता दें कि कुछ दिनों पहले ही राज्यपाल के सचिव की ओर से राज्य के सभी कार्यवाहक कुलपति के लिए निर्देश जारी किया गया था कि वे किसी तरह का निर्णय नहीं लेंगे. साथ ही पैसे की निकासी पर भी रोक लगाई गई थी.

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