बिहार में 9 द्विवार्षिक सीटों और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खाली हुई 1 सीट पर उपचुनाव समेत कुल 10 सीटों के लिए विधान परिषद (Vidhan Parishad) की नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इस चुनाव के बीच बिहार की सियासत में दो चेहरों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश और एनडीए (NDA) के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा का नाम इनमें शामिल है.

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2025 बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तो उस भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे. इसी कैबिनेट में अंतिम क्षणों में दीपक प्रकाश को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी. दीपक प्रकाश फिलहाल बिहार विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. नियम के मुताबिक मंत्री बने रहने के लिए 6 महीने के भीतर सदस्य बनना जरूरी है.

पहले चर्चा थी कि उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी को कैबिनेट में जगह मिलेगी, लेकिन ऐन वक्त पर दीपक प्रकाश मंत्री बन गए. अब जब बिहार में 'सम्राट चौधरी-नीतीश सरकार' (NDA) चल रही है, तो इन 10 सीटों पर दीपक प्रकाश का नाम न होने से उनके मंत्री पद और सियासी भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म है कि वह मंत्रिमंडल में बने रहेंगे या इस्तीफा देंगे.

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बीजेपी नेता का सनसनीखेज दावा

इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर उपेंद्र कुशवाहा को लेकर बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है. बीजेपी नेता के मुताबिक, इस चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा को 'आईना' दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि एनडीए गठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा की हिस्सेदारी और उनकी राजनीतिक जमीन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बीजेपी की है. 2025 के चुनाव परिणामों के बाद से ही बीजेपी लगातार उपेंद्र कुशवाहा पर अपनी पार्टी का विलय (Merge) बीजेपी में करने का दबाव बना रही थी, लेकिन कुशवाहा इसके लिए तैयार नहीं हुए.

विलय से क्यों डर रहे हैं उपेंद्र कुशवाहा?

राजनीतिक विश्लेषकों और खुद उपेंद्र कुशवाहा का मानना है कि बीजेपी में विलय करने से उनका स्वतंत्र राजनीतिक वजूद खत्म हो सकता है. 2020 के विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को अच्छा खासा वोट मिला था. वह जानते हैं कि कुशवाहा जाति के कोर वोट बैंक पर उनकी मजबूत पकड़ है. कुशवाहा को डर है कि यदि वह बीजेपी में शामिल हो गए, तो वह महज पार्टी के कैडर बनकर रह जाएंगे और अपनी शर्तों पर राजनीति नहीं कर पाएंगे.

बेटे का टिकट कटना: बीजेपी का 'पॉलिटिकल शॉक'

बीजेपी नेता ने साफ शब्दों में कहा कि उपेंद्र कुशवाहा द्वारा पार्टी का विलय न करने के कारण ही उनके बेटे को इस बार विधान परिषद (MLC) का उम्मीदवार नहीं बनाया गया.

गौर करने वाली बात यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा की हार के पीछे निर्दलीय चुनाव लड़े पवन सिंह एक बड़ा फैक्टर थे. हालांकि, 2025 के विधानसभा चुनाव आते-आते पवन सिंह और बीजेपी के रिश्ते सुधर गए. ऐसे में बीजेपी ने कुशवाहा की लोकसभा हार की भरपाई (Compensate) उन्हें राज्यसभा भेजकर की थी. बीजेपी चाहती थी कि इस 'कंपनसेशन' के बदले कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय कर दें.

उपेंद्र कुशवाहा ने जब विलय से इनकार किया, तो बीजेपी ने उनके बेटे को परिषद का टिकट न देकर उनके राजनीतिक कद को एक बड़ा झटका दे दिया है. बीजेपी नेता के इन दावों में कितना दम है, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल उपेंद्र कुशवाहा के बेटे का सियासी भविष्य अधर में लटक गया है.

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