बिहार समाज कल्याण विभाग ने किन्नर कल्याण बोर्ड भंग कर दिया है. इसके लिए समाज कल्याण विभाग की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया है. बिहार राज्य किन्नर बोर्ड सुर्खियों में भी था. बोर्ड की ओर से पटना में पीएम मोदी का मंदिर बनाने की मांग की जा रही थी. बीते दिनों बोर्ड के सदस्यों ने दिल्ली प्रेस क्लब में मोदी चालीसा का पाठ भी किया था.

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समाज कल्याण विभाग द्वारा अब बोर्ड में मनोनीत और सरकारी सदस्यों की सदस्यता/मनोयन को भी समाप्त कर दिया गया है. सरकार ने यह फैसला केंद्र सरकार के The Transgender Persons (Protection of Rights) Amendment Act, 2026 में हुए बदलावों के बाद बोर्ड के पुनर्गठन की आवश्यकता बताते हुए लिया है.

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नए बोर्ड में अलग-अलग वर्गों की भागीदारी होगी सुनिश्चित

 नए बोर्ड में राज्य में रहने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. राज्य सरकार अब केंद्र के नए कानून में हुए बदलावों के अनुसार बोर्ड का नए सिरे से गठन करेगी, इसका उद्देश्य नए कानूनी प्रावधानों के अनुसार बोर्ड की संरचना तैयार करना और ट्रांसजेंडर समुदाय के अलग-अलग वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना है.

बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड का पुनर्गठन 7 अगस्त 2025 की अधिसूचना के माध्यम से तीन वर्षों के लिए किया गया था. बोर्ड का गठन बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड गठन नियमावली 2015 के तहत किया गया था. मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था. हालांकि सरकार ने नए केंद्रीय संशोधन कानून का हवाला देते हुए मौजूदा बोर्ड के सभी मनोनयन समाप्त करने का फैसला लिया है.

आदेश में क्या कहा गया?

विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड गठन नियमावली, 2015 के नियम 4 (1), 4(2) एवं 4(3) अंतर्गत बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड का स्वरूप एवं संरचना, सदस्यों के मनोनयन आदि प्रावधानों के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा तीन वर्षों के लिए अधिसूचना संख्या-1773 (07.08.2025) द्वारा बोर्ड पुर्नगठित है.

आगे कहा गया, "वर्तमान में विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के द्वारा 30 मार्च 2026 को The Transgender Persons (Protection of Rights) Amendment Act, 2026 अधिसूचित किया गया है. इस प्रकार संशोधन अधिनियम, 2026 में किए गए महत्वपूर्ण संशोधन, बदलते परिवेश एवं राज्य में आवासित ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दृष्टि से बोर्ड का पुर्नगठन किया जाना आवश्यक है. तदालोक में मनोनीत गैर सरकारी सदस्यों की सदस्यता/मनोनयन समाप्त किया जाता है.

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