बिहार की सियासत में इन दिनों जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वह है दीपक प्रकाश. दीपक प्रकाश वही जो 7 महीने में दो बार मंत्री बने. सबसे पहले दीपक प्रकाश बीते वर्ष 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद नीतीश कुमार की अगुवाई वाली कैबिनेट में 20 नवंबर 2025 को मंत्री बने. फिर जब इस साल अप्रैल में मुख्यमंत्री बदले और राज्य में नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद का जिम्मा संभाला, उस सरकार में भी दीपक प्रकाश मंत्री बने. दीपक प्रकाश फिलहाल 7 मई 2026 से सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्रित्व वाली बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं.

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बिहार में दीपक प्रकाश के पहली बार मंत्री बनने से लेकर दूसरी बार शपथ लेने तक यह चर्चा थी कि बिहार विधान परिषद् के चुनावों में उन्हें भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से प्रत्याशी बनाया जाएगा. फिर विधान परिषद् चुनावों की लिस्ट आई.

पहले जनता दल यूनाइटेड (JDU), फिर भारतीय जनता पार्टी और उसके बाद लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) की. किसी भी लिस्ट में जब दीपक प्रकाश का नाम नहीं दिखा तो यह सवाल उठने लगे कि 7 महीने पहले अचानक से मंत्री बने दीपक प्रकाश का सियासी भविष्य क्या होगा?

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उपेंद्र कुशवाहा ने क्या कहा है?

दीपक प्रकाश को प्रत्याशी न बनाने के बाबत जब उनके पिता और राष्ट्रीय लोकमोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह इससे नाराज नहीं हैं. 

राज्यसभा सांसद कुशवाहा ने कहा था कि एनडीए के सभी उम्मीदवारों को बधाई है. उनका निर्विरोध निर्वाचन भी तय है. अपने बेटे दीपक प्रकाश को एमएलसी नहीं बनाए जाने के सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यह मामला ओवर हो चुका है. जब तक के लिए लोगों ने मंत्री बनाया है तब तक दीपक प्रकाश रहेंगे. 

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बीजेपी की तरफ से किए गए वादे के सवाल पर कुशवाहा ने कहा कि जिन लोगों ने वादा किया था उनसे जाकर पूछिए एनडीए के साथ बने रहेंगे और नाराजगी की बात तो फालतू है.

इसी मामले में पर एनडीए के एक और सहयोगी दल लोजपा (रामविलास) के नेता और सांसद अरुण भारती ने कहा कि  गठबंधन में सभी को बड़ा दिल रखना पड़ता है. हर दल को सब कुछ नहीं मिलता, बड़ा दिल रखकर अपने गठबंधन के लिए काम करना पड़ता है.

दीपक प्रकाश के पास क्या विकल्प हैं?

इन सबके बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर अब दीपक प्रकाश के पास क्या विकल्प हैं और क्या उन विकल्पों का  रास्ता उनके पिता उपेंद्र कुशवाहा के एक बहुत ही अहम फैसले से गुजर कर जाएगा.

दरअसल, बीते 2025 में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव के पहले यह चर्चा थी कि उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय भारतीय जनता पार्टी में कर सकते हैं. विधानसभा चुनाव के इर्द गिर्द जब-जब कुशवाहा का दिल्ली दौरा हुआ, तब-तब इन चर्चाओं ने जोर पकड़ा. 

अब जब एमएलसी चुनाव की लिस्ट में दीपक प्रकाश को एनडीए की ओर से मौका नहीं मिला, तब एक बार फिर इस चर्चा  जोर मिला. अंग्रेजी अखबार द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार कुशवाहा ने आरएलएम के बीजेपी में विलय के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. उनका मानना है कि वह अपनी और पार्टी की पहचान को अलग बनाए रखते हुए एनडीए में यथावत रहना चाहते हैं. 

केंद्रीय मंत्री बनेंगे कुशवाहा?

जानकारों की मानें तो अगर कुशवाहा, अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में करने को तैयार हो जाते हैं तो इस बात की संभावना है कि मोदी मंत्रिमंडल में निकट भविष्य में फेरबदल में उनको केंद्रीय कैबिनेट में जिम्मेदारी मिल जाए और बिहार में उनके बेटे दीपक प्रकाश से मंत्री पद वापस ले लिया जाए. 

या संभावना इस बात की भी जताई जा रही है कि कुशवाहा, अपने बेटे का मंत्रीपद बरकरार रखने के लिए कोई और जुगत लगाएं.

JDU से भी कुशवाहा के रिश्ते ठीक नहीं

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव परिणाम के कुछ दिनों बाद ही आरएलएम के विधायकों और कुशवाहा के बीच विवाद सामने आया था. कुछ विधायकों ने दिल्ली में अलग से बैठक की थी. इसी टूट के डैमेज कंट्रोल के परिणामस्वरूप कुशवाहा ने बागियों में से एक आलोक कुमार सिंह को पार्टी की बिहार प्रदेश की इकाई का अध्यक्ष बनाया था. संगठन में कुछ अहम फेरबदल के बाद बीते कुछ महीनों से RLM के संगठन के आंतरिक विवाद बाहर नहीं आ रहे हैं. 

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यहां एक बात और गौर करने लायक है कि उपेंद्र कुशवाहा के जनता दल यूनाइटेड से भी रिश्ते ठीक नहीं हैं. कुशवाहा ने कुछ समय तक नीतीश कुमार के साथ काम भी किया था. हालांकि बाद में दोनों की राहें जुदा हो गईं. ऐसे में जदयू अपने कोटे से दीपक प्रकाश को एमएलसी बनने का मौका नहीं देगी.

अब यह देखना होगा कि उपेंद्र कुशवाहा, येन-केन-प्रकारेण बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचाए रख पाएंगे या पार्टी का विलय कर अपना प्रमोशन कराएंगे.