बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के वक्त राजधानी पटना समेत तमाम जिलों में नीतीश कुमार की तस्वीर के साथ पोस्टर लगे 25-30 नीतीश. यानी साल 2025 से लेकर 2030 तक नीतीश कुमार ही सीएम रहेंगे. लेकिन सियासत अजीब शय है. यहां कब क्या हो जाए, कुछ पता नहीं. जनता दल यूनाइटेड ने जहां 5 साल तक नीतीश के सीएम रहने का सपना देखा था, आज वही नीतीश सिर्फ चार महीने में 1 अणे मार्ग से अब दिल्ली के लुटियन्स जोन की तरफ आ रहे हैं. 

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अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये सब अचानक से हुआ? तो इसका जवाब है नहीं. पहले माहौल बनाने की कोशिश हुई, जब हवा का रुख खिलाफ लगा तो नीतीश को ही साथ लिया और अब जब चीजें अपने हिसाब से पटरी पर आती दिख रहीं हैं तो उस योजना को क्रियान्वित किया जा रहा है जो महीनों पहले बनीं थी.

महीनों पहले बनी योजना- एक्सपर्ट

एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए राजनीतिक विश्लेषक प्रियदर्शी रंजन ने कहा कि यह अचानक से नहीं हुआ है. इसकी योजना पहले बनी और अब इसे लागू किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस पर चर्चा ऐसे दिन शुरू की गई जब लोग दूसरे माहौल में थे.

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उन्होंने कहा कि यह बात सच है कि हटाने का प्लान अचानक से नहीं बना है. इसके लिए होली का दिन चुना गया. यह दिन इसीलिए चुना गया कि जिस नीतीश कुमार के चेहरे पर एनडीए चुनाव जीती, उनके राज्यसभा जाने की बात जानकर लोग भड़क न जाएं. अब आखिर वही हो रहा है. भविष्य में जदयू की भावभंगिमा बदलेगी.  अभी तक बीजेपी ने पूरे विश्वास में नीतीश को लिया है. मेरी जानकारी के अनुसार जदयू की शर्त है कि सीएम वही होगा जिस पर दोनों पार्टियां सहमत होंगी और जिस पर नीतीश कुमार की मुहर लगेगी.

बिहार में भी ऑपरेशन लोटस?

पत्रकार अनंत विजय ने कहा कि यह एक ऑपरेशन है. उन्होंने कहा कि इसको मैं ऑपरेशन ही कहता हूं. जिस प्रकार से ये सत्ता परिवर्तन हुआ उसके पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प होगी. यह ऑपरेशन कल का नहीं है. यह पिछले सात-आठ दिनों से चल रहा है. कई बैठकों का दौर चला. कभी हां, कभी न के बीच कल बताने तक के दावे अब इतिहास है. अब चर्चा होनी चाहिए कि सीएम कौन बनेगा?