बिहार की सियासत में 'सुशासन' और 'अपराध' के मुद्दे पर एक नई बहस छिड़ गई है. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस 'कानून के राज' को अपनी सबसे बड़ी यूएसपी (USP) बनाया था, अब राज्य के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (CM Samrat Choudhary) उसी राह पर थोड़ा अलग और आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ते दिख रहे हैं. बच्चियों के साथ कुकृत्य करने वाले अपराधियों पर 'माला चढ़ाने' (एनकाउंटर की ओर इशारा) के सीएम के खुले निर्देश के बाद बिहार में सियासी घमासान मच गया है.

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा डीजीपी, डीएम और एसपी के साथ हुई बैठक में पुलिस को दी गई इस 'खुली छूट' पर मुख्य विपक्षी दल आरजेडी (RJD) ने कड़ा ऐतराज जताया है. राजद के मुख्य प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने जेडीयू से सीधा सवाल पूछते हुए कहा, "मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का अपराधियों पर माला चढ़ाने का निर्देश क्या योगी मॉडल है या फिर नीतीश मॉडल? क्या अब अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की यही नई नीति होगी?"

JDU का पलटवार- गोली का जवाब गोली से मिलेगा

विपक्ष के इन सवालों पर एनडीए के मुख्य घटक दल जेडीयू (JDU) ने सीएम सम्राट चौधरी का पुरजोर बचाव किया है. जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा, "नीतीश कुमार जी ने बिहार में कानून का राज स्थापित किया है. सीएम सम्राट चौधरी बहुत बेहतर काम कर रहे हैं और उनके निर्देश कानून के दायरे में ही हैं." विपक्ष को जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया, "पुलिस अपराधियों की आवभगत के लिए नहीं है. अपराधियों के मनोबल को गिराने के लिए हमारी पुलिस पूरी तरह सक्षम है. अपराधियों की गोली का जवाब अब गोली से ही दिया जाएगा."

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BJP का दावा- बिल में घुस गए हैं अपराधी

पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक रामकृपाल यादव ने भी मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, "सरकार की पहली प्राथमिकता विधि-व्यवस्था को दुरुस्त रखना है. सीएम सम्राट चौधरी उसी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को अपना रहे हैं, जो पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने बनाई थी. जो भी अमन-चैन बिगाड़ने की कोशिश करेगा, उसे मुकम्मल जवाब दिया जाएगा."

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा 'अपराधियों को सम्राट' कहे जाने पर रामकृपाल यादव ने तीखा तंज कसते हुए कहा, "मुख्यमंत्री खुद सम्राट हैं और उनके डर से अपराधी अब बिल में घुस गए हैं."

सियासी गलियारों में उठ रहे ये बड़े सवाल

बिहार में बीजेपी कोटे से मुख्यमंत्री बनने के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार की एनडीए सरकार पर अब भी नीतीश कुमार की पकड़ है, या सत्ता की पूरी कमान बीजेपी के हाथों में आ गई है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस राज्य में अपराधी कानून के तहत जेल जाते थे, वहां पुलिस को 'एनकाउंटर' जैसी छूट देने की बात क्या बिहार में एक 'नए सियासी और पुलिसिंग युग' की शुरुआत है?