बिहार सरकार नई परीक्षा नीति लाई है. इसमें राज्य के नौ प्रमंडल और पटना के बापू परीक्षा केंद्र यानी कुल 10 केंद्रों पर पूरी ऑनलाइन परीक्षाएं संपन्न कराई जाएगी. अब इसे लेकर बिहार ऑनलाइन सेंटर एसोसिएशन ने करीब 50 हजार लोगों से रोजगार छिनने का हवाला देते हुए सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की चेतावनी दी है.

Continues below advertisement

एसोसिएशन के अध्यक्ष कन्हैया सिंह ने कहा कि BSEB की परीक्षा नीति से प्रदेश के 200 ऑनलाइन परीक्षा सेंटरों का अस्तित्व संकट में है. बिहार सरकार और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा बनाए गए बापू परीक्षा केंद्र और आदर्श परीक्षा केंद्रों में लगभग 11500 कंप्यूटर (नोड्स) लगाए जा चुके हैं. 

BSEB ने जारी की 10 हजार कंप्यूटर लगाने की निविदा

हाल ही में BSEB द्वारा 10 हजार नए कंप्यूटर लगाने की निविदा भी जारी की गई है। यह भी महत्वपूर्ण है कि ये बापू परीक्षा केंद्र और आदर्श परीक्षा केंद्र पीपीपी (PPP-पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर बनाए गए हैं यानी सरकार ने इन केंद्रों का संचालन बड़ी निजी कंपनियों के हाथों में सौंप दिया है. 

Continues below advertisement

इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी नाम पर चल रहे ये केंद्र भी वास्तव में निजी कंपनियों के माध्यम से ही संचालित हो रहे हैं. दूसरी ओर बिहार में लगभग 250 निजी परीक्षा केंद्र कार्यरत हैं जिनमें लगभग 15,000 कंप्यूटर नोड्स उपलब्ध हैं. 

इनमें से कई ऐसे केंद्र हैं जो वर्ष 2010-11 से लगातार सफलतापूर्वक परीक्षाएं आयोजित करा रहे हैं. जब बिहार में कोई सरकारी परीक्षा केंद्र नहीं था उस समय से ही निजी केंद्रों ने अपने तकनीकी और मानवीय संसाधनों के बल पर बिहार में ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली पद्धति को खड़ा किया. 

पूरी तरह से व्यवसायिक बने पीपीपी मोड के परीक्षा केंद्र

आज स्थिति यह है कि सरकारी नाम से चल रहे पी.पी.पी. मोड के परीक्षा केंद्रों को अब पूरी तरह से व्यवसायिक बना दिया गया है और केंद्र सरकार व राज्य सरकार की लगभग सभी परीक्षाएं उन्हीं में कराई जा रही हैं. इससे वर्षों से काम कर रहे स्थानीय निजी परीक्षा केंद्रों को कोई अवसर नहीं मिल पा रहा है और पूरा सेक्टर बंद होने के कगार पर पहुंच गया है).

निजी परीक्षा केंद्रों से सीधे तौर पर 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। कई संचालकों ने जमीन बेचकर, लोन लेकर और अपने जीवन भर की पूंजी लगाकर ये केंद्र बनाए हैं. अब जब परीक्षाएं आयोजित कराने का अवसर ही नहीं मिलेगा तो उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाना स्वाभाविक है.

'हजारों बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा'

इन परिवारों के बच्चे स्कूल-कॉलेज में पढ़ रहे हैं, कुछ बच्चे बाहर भी पढ़ रहे हैं. जब आमदनी ही बंद हो जाएगी तो उनकी फीस, किराया और पढ़ाई कैसे चलेगी? इससे हजारों बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा. 

बिहार ऑनलाइन सेंटर एसोसिएशन जो वर्ष 2018 से कार्य कर रही है, हमेशा से पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत परीक्षा प्रणाली की समर्थक रही है. निजी परीक्षा केंद्रों ने परीक्षा एजेंसियों की हर तकनीकी शर्त और जरूरी संसाधनों को पूरा किया है और वर्षों से ईमानदारी से काम किया है. 

कई सालों से आयोजित हो रही हैं CBT परीक्षा

लगभग पिछले 14-15 वर्षों से बिहार के निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों द्वारा IBPS, JEE (Main एवं Advanced), SSC, Railway, NEET, PG, GATE, DRDO, DCL सहित देश की सबसे प्रतिष्ठित कंप्यूटर आधारित (CBT) परीक्षाओं को सफलतापूर्वक आयोजित किया जाता रहा है.

कन्हैया सिंह ने कहा कि अभी हम लोग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, शिक्षा मंत्री बिहार विद्यालय परीक्षा समिति और मुख्य सचिव सभी को अपना ज्ञापन देने जा रहे हैं. अगर हम पर ध्यान नहीं दिया गया तो हम लोग सड़कों पर आंदोलन करेंगे, आमरण अनशन करेंगे.