बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरह सम्राट चौधरी भी अब जनता दरबार लगाएंगे. शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) से इसकी शुरुआत हो गई. सम्राट चौधरी के इस कदम से यह तो साफ हो गया है कि वे पूर्व सीएम नीतीश की परंपरा को आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं. 

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2006 में शुरू किया गया था जनता दरबार

इस जनता दरबार में बिहार के अलग-अलग जिलों से फरियादी पहुंचेंगे और उनकी समस्या का समाधन ऑन द स्पॉट होगा. जनता दरबार में आने के लिए लोगों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा. 2006 में नीतीश कुमार ने जनता दरबार कार्यक्रम की शुरुआत की थी.

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दूसरी ओर आज (शक्रवार) विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय अभियान- 'भारत की जनगणना-2027' का सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री सचिवालय से शुभारंभ किया. इस अवसर पर सम्राट चौधरी ने राज्यवासियों से जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना सुशासन की आधारशिला है. यह आने वाले वर्षों में विकास योजनाओं, नीतियों और कल्याणकारी कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. जनगणना-2027 तकनीकी दृष्टि से एक ऐतिहासिक पहल है. इसमें पहली बार पूर्णतः डिजिटल डेटा संग्रहण तथा स्व-गणना (Self & Enumeration) की सुविधा 17 अप्रैल 2026 से 01 मई 2026 उपलब्ध रहेगी. 

'राष्ट्रीय महत्व के अभियान में बढ़-चढ़कर लें भाग'

उन्होंने कहा कि राज्य में जनगणना-2027 के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing Operations- HLO) का कार्य 02 मई 2026 से 31 मई 2026 तक किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें.

सम्राट चौधरी ने कहा कि स्व-गणना के माध्यम से या प्रगणकों को सहयोग प्रदान कर एक सटीक, समावेशी और विश्वसनीय जनगणना संपन्न करने में अपना सहयोग दें. 'जनगणना-2027' बिहार एवं देश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगी.

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