बिहार के नवादा जिले में मंगलवार (24 मार्च) रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया. परनवादा टेली टोला मोहल्ले के रहने वाले 35 वर्षीय पंकज कुमार और उनकी पत्नी सुषमा देवी की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौके पर ही मौत हो गई.

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दोनों एक पारिवारिक बर्थडे पार्टी से लौट रहे थे, तभी नेमदारगंज थाना क्षेत्र के चेता बीघा गांव के पास पीछे से तेज रफ्तार वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों सड़क पर गिरकर वाहन की चपेट में आ गए और मौके पर ही दम तोड़ दिया. हादसे के बाद चालक वाहन लेकर फरार हो गया.

बेटी गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती

इस हादसे में दंपति की 11 साल की बेटी परी कुमारी भी गंभीर रूप से घायल हो गई है. उसे तुरंत पास के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है.

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डॉक्टर लगातार उसकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. परिवार के लोगों का कहना है कि कुछ घंटे पहले तक सब लोग खुशी के माहौल में थे, लेकिन इस हादसे ने सब कुछ बदल दिया.

मृतक दंपति अपने पीछे एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं. पंकज कुमार के चचेरे भाई चंदन कुमार ने बताया कि पूरा परिवार एक रिश्तेदार के बेटे के जन्मदिन समारोह में शामिल होने गया था. लौटते वक्त यह हादसा हो गया.

जैसे ही खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में मातम पसर गया. पड़ोसी और रिश्तेदार परिवार को संभालने में जुटे हैं, लेकिन बच्चों की हालत देखकर हर किसी की आंखें नम हैं.

पुलिस जांच में जुटी, आरोपी की तलाश जारी

घटना की सूचना मिलते ही नेमदारगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ हिट एंड रन का मामला दर्ज कर लिया है. आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और गवाहों से पूछताछ की जा रही है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा.

सड़क की खराब व्यवस्था पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में सड़क पर अव्यवस्थित पासिंग क्रॉसिंग और तेज रफ्तार वाहनों के कारण अक्सर हादसे होते रहते हैं. लोगों ने प्रशासन से कई बार सुधार की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इस हादसे के बाद लोगों में गुस्सा भी देखा जा रहा है.

नवादा जिले में सड़क हादसों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च से 24 मार्च के बीच करीब 10 लोगों की मौत हो चुकी है. सिर्फ मार्च महीने में ही 6 से 8 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में जा चुकी है. यह आंकड़े प्रशासन की चिंता बढ़ाने के लिए काफी हैं.

स्थानीय लोगों और मृतक परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए जाएं. साथ ही तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण और सड़क व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके. यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक लापरवाही की वजह से निर्दोष लोगों की जान जाती रहेगी.