मानसून सत्र के दूसरे दिन आज (मंगलवार) सदन में बीजेपी के विधायक जिवेश कुमार ने स्कूल में क्लासरूम की कमी को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाया. स्पीकर के सामने अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को नीतिगत फैसला लेना चाहिए. दो कमरे में 565 बच्चे पढ़ रहे हैं. हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं कि बहला रहे हैं? 

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उन्होंने आगे कहा, "हमारे यहां का मामला है… ऐसे कई विद्यालय हैं… यहां मुख्यमंत्री जी बैठे हैं… खूब संजीदगी से इस पर विचार हो… हम 77 हजार करोड़ के शिक्षा का बजट बना सकते हैं, हम जमीन खरीदकर विद्यालय क्यों नहीं बना सकते हैं? हमारी प्राथमिकता क्या है? सरकार बजट में प्रावधान करे और ऐसे स्कूलों को चिह्नित करे… दो शिफ्ट में विद्यालय चल रहा है… 600-600 बच्चे पढ़ रहे हैं. इसको प्राथमिकता में रखते हुए तुरंत सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए."

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कमरों और स्कूल को लेकर आरजेडी ने पूछा सवाल

इस दौरान सदन में आरजेडी के विधायक आलोक कुमार मेहता ने स्पीकर से कहा कि जमीन खरीदा और कमरा बनाना दोनों अलग-अलग चीजें हैं. जहां पर जमीन है वहां भी कमरों की संख्या कम है और छात्रों की संख्या बहुत अधिक है. उन्होंने कहा कि अब जहां भी स्कूल है वहां के आसपास में सरकार की जमीन नहीं है. हम जानना चाहते हैं कि क्या सरकार स्कूल के बगल में जमीन अधिग्रहण कर विद्यालय में भवन बनाना चाहती है?

आलोक मेहता ने कहा, "तुगलती फरमान होता रहा है… कभी जिले को दे दिया गया कि आप भवन बनवाएं तो कभी बिहार स्टेट एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को दे दिया गया कि आप बनाइए… तो इस तरह का वातावरण बना हुआ है कि जिम्मेदारी स्थापित नहीं हो रही है, यह बताया जाए कि सरकार की दिलचस्पी विद्यालय में कमरों को लेकर और जमीन अधिग्रहण कर विद्यालय का विस्तार करने में है या नहीं, अगर नहीं तो आखिर क्यों?"

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